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किशनगंज में रिश्वतखोर अधिकारी पर गिरी गाज: 50 हजार घूस लेते DPO अनीता कुमारी गिरफ्तार, घर से मिले लाखों कैश

बिहार,जीरो टॉलरेंस’

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हासिल की है। किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में तैनात बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO/DPO) अनीता कुमारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जब उनके आवास की तलाशी ली गई, तो वहां से बरामद नकदी ने विभाग के होश उड़ा दिए।

10 लाख की डिमांड और 50 हजार की पहली किश्त
जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई नालंदा जिले के निवासी नागेंद्र कुमार की शिकायत पर की गई। नागेंद्र कुमार ने एसवीयू को बताया था कि डीपीओ अनीता कुमारी उन्हें विभागीय कार्रवाई और निलंबन का डर दिखाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थीं। आरोप पत्र गठित करने की धमकी देकर मामले को रफा-दफा करने के बदले अधिकारी ने 10 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी।

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शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विशेष निगरानी इकाई ने आरोपों का सत्यापन कराया। मामला सही पाए जाने पर जाल बिछाया गया और शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को जैसे ही अनीता कुमारी ने रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये लिए, पहले से घात लगाकर बैठी टीम ने उन्हें दबोच लिया।

आवास पर छापेमारी: नोटों की गड्डियां देख रह गए दंग
अनीता कुमारी की गिरफ्तारी महज शुरुआत थी। विशेष निगरानी इकाई की टीम उन्हें लेकर उनके आवास पर पहुंची और गहन तलाशी शुरू की। छापेमारी के दौरान टीम को 4 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जिसके स्रोत के बारे में अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कांड संख्या 08/2026 दर्ज कर लिया गया है।

विभाग में हड़कंप: कल होगी न्यायालय में पेशी
इस गिरफ्तारी के बाद से आईसीडीएस (ICDS) विभाग और जिला प्रशासन के गलियारों में सन्नाटा पसरा है। जिले के अन्य अधिकारियों और कर्मियों के बीच इस कार्रवाई की चर्चा तेज है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कड़े प्रहार को लेकर आम जनता में काफी उत्साह है।निगरानी विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को शनिवार को पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा। साथ ही, बरामद संपत्ति और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है ताकि अवैध कमाई के पूरे साम्राज्य का खुलासा हो सके।

यह कार्रवाई बिहार के उन सरकारी सेवकों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो पद का दुरुपयोग कर आम जनता और अधीनस्थ कर्मचारियों का शोषण करते हैं। निगरानी विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कई और रसूखदार अधिकारी उनकी रडार पर हो सकते हैं।

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