
बिहार की राजधानी में घर से दूर रहकर नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए राज्य सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा पटना के रूपसपुर स्थित IAS कॉलोनी में नवनिर्मित ‘कामकाजी महिला छात्रावास’ का भव्य उद्घाटन किया गया। विभाग की सचिव वंदना प्रेयषी ने फीता काटकर इस छात्रावास को महिलाओं को समर्पित किया। मुजफ्फरपुर के बाद, पटना राज्य का दूसरा ऐसा जिला बन गया है जहाँ इस आधुनिक हॉस्टल की सुविधा शुरू की गई है। विभाग की योजना जल्द ही गया जैसे अन्य बड़े शहरों में भी इसे विस्तार देने की है।
शानदार सुविधाएं और किफायती दाम;
इस छात्रावास की सबसे बड़ी विशेषता इसका खर्च है। आज के महंगाई के दौर में, जहाँ पटना जैसे शहर में रहने-खाने का खर्च ₹8,000 से ₹10,000 तक आता है, वहीं सरकार इसे मात्र ₹3000 प्रति माह में उपलब्ध करा रही है।
हॉस्टल की मुख्य विशेषताएं;
आवास: 16 कमरों वाले इस चार मंजिला भवन में कुल 50 बेड की व्यवस्था है।
भोजन: मात्र ₹3000 के शुल्क में ही महिलाओं को पौष्टिक ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर (सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का खाना) मिलेगा।
सुरक्षा: कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर में CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
सुविधाएं: भवन में ऊपर-नीचे आने-जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा दी गई है।
मनोरंजन और सेहत का भी ख्याल;
कामकाज के तनाव से दूर रहने के लिए हॉस्टल में एक विशेष मनोरंजन कक्ष (Recreation Room) बनाया गया है। यहाँ टीवी और साउंडबॉक्स के साथ-साथ इनडोर गेम्स जैसे कैरम बोर्ड और चेस की व्यवस्था है। दरअसल, स्वास्थ्य आपातकाल के लिए यहाँ एक समर्पित ‘सिक रूम’ (Sick Room) भी तैयार किया गया है। यदि कोई महिला बीमार पड़ती है, तो उसे यहाँ आराम करने और डॉक्टर से परामर्श लेने की सुविधा मिलेगी।
‘पहले आओ, पहले पाओ’ का नियम;
छात्रावास में सीमित सीटें होने के कारण विभाग ने “पहले आओ, पहले पाओ” की नीति अपनाई है। जो महिलाएं पहले आवेदन करेंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बेड आवंटित किए जाएंगे। सचिव वंदना प्रेयषी के अनुसार, “हमारा उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को एक सुरक्षित और घर जैसा माहौल प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी चिंता के अपने करियर पर ध्यान दे सकें। पटना के बाद अब गया में भी इसे शुरू करने की तैयारी है।”

