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बिहार में महिला सशक्तिकरण की बड़ी पहल: 25 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर

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बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत राज्य की 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की। कुल 2500 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम राशि के वितरण के साथ ही प्रदेश में महिला उद्यमिता के एक नए युग की शुरुआत हो गई है।

डिजिटल माध्यम से जुड़ीं लाखों महिलाएं
राजधानी पटना में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बटन दबाकर इस राशि का हस्तांतरण किया। यह आयोजन केवल राजधानी तक सीमित नहीं था; बिहार के सभी 38 जिलों, प्रखंडों और संकुल स्तर पर भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में आयोजित इन कार्यक्रमों में जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लाखों महिलाओं ने हिस्सा लिया। आंकड़ों के अनुसार, 1680 संकुल स्तरीय संघों और लगभग 70,000 ग्राम संगठनों में इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया।

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5 चरणों में मिलेगी 2 लाख की मदद
बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत महिलाओं को अपना लघु उद्योग या स्वरोजगार स्थापित करने के लिए कुल 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी, जिसे पांच किश्तों में वितरित करने का प्रावधान है। योजना के पहले चरण में आज 10,000 रुपये की राशि सीधे खातों में भेजी गई है, जिसके बाद दूसरे चरण में 20,000 रुपये, तीसरे में 40,000 रुपये, चौथे में 80,000 रुपये और अंतिम यानी पांचवें चरण में 60,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

पारदर्शिता के लिए 3398 वार्डों में तैनात होंगे विशेष कर्मी
योजना का लाभ सही और पात्र महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। बिहार के 3398 वार्डों (ग्रामीण और शहरी) में विशेष कर्मियों की तैनाती की जाएगी। ये कर्मी घर-घर जाकर आवेदकों का फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) करेंगे। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगले चरणों की राशि जारी की जाएगी, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।

नीतीश सरकार का यह कदम ‘जीविका’ दीदियों और ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से महिलाएं सिलाई, लघु उद्योग या खेती से जुड़े छोटे व्यवसाय शुरू कर सकेंगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।

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