
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार इन दिनों अपने गया दौरे को लेकर सुर्खियों में हैं। जहां एक ओर राजनीतिक गलियारों में उनके सक्रिय राजनीति में आने की अटकलें तेज हैं, वहीं दूसरी ओर उनके इस दौरे में विकास कार्यों के प्रति गंभीरता और गहरी आध्यात्मिक निष्ठा की झलक देखने को मिली। वहीं, निशांत कुमार का यह दौरा केवल एक निजी यात्रा नहीं, बल्कि विकास, विरासत और विश्वास का एक अनूठा मेल नजर आया। नंगे पांव बोधगया की धरती पर चलना उनकी सादगी और आध्यात्मिक झुकाव को स्पष्ट करता है, जिसने जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश दिया है।
पिता के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ का जायजा;
निशांत कुमार ने गया में मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘गंगा जल आपूर्ति योजना’ के तहत टेटर जलाशय का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से पाइपलाइन के जरिए जल शोधन (Purification) और वितरण प्रणाली की विस्तृत जानकारी ली। यह दौरा दर्शाता है कि वे राज्य की बुनियादी समस्याओं और उनके समाधान की प्रक्रियाओं को गहराई से समझ रहे हैं।
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‘माउंटेन मैन’ को नमन और परिवार से मुलाकात;
गया के दौरे पर निशांत कुमार दशरथ मांझी मेमोरियल पहुंचे। वहां उन्होंने न केवल ‘माउंटेन मैन’ की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि उनके संघर्ष के प्रतीक उस पहाड़ को भी देखा जिसे मांझी ने 22 वर्षों की मेहनत से काटा था। उन्होंने दशरथ मांझी के बेटे से आशीर्वाद लिया और उनके परिवार का हाल-चाल जाना। उन्होंने मांझी के अटूट संकल्प और प्रेम को सलाम करते हुए उन्हें मानवता का प्रेरणास्रोत बताया।
बोधगया में नंगे पांव ‘ज्ञान’ की खोज;
इस यात्रा का सबसे चर्चा में रहने वाला हिस्सा उनकी आध्यात्मिक यात्रा रही। बोधगया में निशांत कुमार ने पूरी श्रद्धा के साथ नंगे पांव भ्रमण किया। उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान लगाया और बुद्ध के ‘मध्यम मार्ग’ व ‘अप्प दीपो भव’ (अपना दीपक स्वयं बनें) के दर्शन को समझा। उन्होंने विदेशी पर्यटकों से संवाद किया, बुद्ध से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन किया और 80 फीट की बुद्ध प्रतिमा व शयन मुद्रा बुद्ध के दर्शन किए।
