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पटना हॉस्टल कांड: शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची CBI की टीम, सुराग की तलाश में खंगाला NEET छात्रा का कमरा

बिहार,: शंभू गर्ल्स हॉस्टल

पटना में नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत और दुष्कर्म के मामले में न्याय की उम्मीदें अब तेज हो गई हैं। शनिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम जांच के लिए पटना के उसी शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची, जहाँ छात्रा के साथ दरिंदगी की आशंका जताई गई है। CBI ने केस की कमान संभालते ही घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्राइम सीन का री-क्रिएशन और तकनीकी जांच
CBI की टीम के साथ पटना पुलिस की SIT और केस की आईओ (IO) सचिवालय एसडीपीओ डॉ. अन्नू भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने सीधे उस कमरे की तलाशी ली जहाँ छात्रा रहती थी। टीम ने केवल कमरे के सामानों की ही जांच नहीं की, बल्कि हॉस्टल के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स का भी निरीक्षण किया। CBI यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना के दिन छात्रा किस समय हॉस्टल पहुंची, वह किस ऑटो से आई थी और उसकी तबीयत बिगड़ने का सटीक समय क्या था।

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चूँकि हॉस्टल एक भीड़-भाड़ वाले इलाके में स्थित है जहाँ आसपास दुकानें और रिहायशी मकान हैं, इसलिए टीम यह भी देख रही है कि क्या किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश संभव था।

केस डायरी और सबूतों का हैंडओवर
CBI ने औपचारिक रूप से केस दर्ज करने के बाद पटना एसएसपी (SSP) से केस डायरी, अब तक खंगाले गए CCTV फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट मांग ली है। जांच की जिम्मेदारी एएसपी पवन कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई है। शुक्रवार को ही सीबीआई ने एसआईटी और एसडीपीओ को केस डायरी के साथ तलब किया था ताकि अब तक की स्थानीय पुलिस की जांच और नई जांच के बीच कड़ियों को जोड़ा जा सके।

अब तक क्या हुआ: उलझी हुई गुत्थी
6 जनवरी को छात्रा पटना के हॉस्टल के कमरे में रहस्यमयी परिस्थितियों में बेहोश पाई गई थी, जिसकी इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मृतका के साथ दुष्कर्म की पुष्टि कर पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया। जांच के दौरान DNA टेस्ट के लिए फॉरेंसिक टीम को छात्रा के कपड़ों से स्पर्म के नमूने मिले, जिसके आधार पर पुलिस ने हॉस्टल और आसपास के 18 संदिग्धों के सैंपल लिए, पर किसी से भी मिलान (मैच) नहीं हो सका। अंततः मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने 31 जनवरी को इसकी सिफारिश की, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलते ही 12 फरवरी को CBI ने औपचारिक रूप से जांच की कमान संभाल ली।

पप्पू यादव की सक्रियता और राजनीतिक दबाव
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने इसे जन आंदोलन बना दिया। उन्होंने पीड़िता के परिवार के साथ मिलकर न्याय की आवाज उठाई और पुलिसिया जांच में खामियों को उजागर किया। अब जब CBI मैदान में है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर असली अपराधी सलाखों के पीछे होंगे।

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