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दूसरों पर उंगली, पर खुद के दामन पर ‘यौन शोषण’ के दाग! NEET मामले में सरकार को कोसने वाले अमिताभ दास का पुराना काला चिट्ठा आया सामने

बिहार,यौन शोषण’

अपनी बेबाक और अक्सर विवादित टिप्पणियों के लिए चर्चित रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास एक बार फिर सुर्खियों में हैं। केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ तीखी बयानबाजी को लेकर चर्चा में रहने वाले दास पर अब गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे चर्चा में बने रहने के लिए अमर्यादित भाषा का सहारा ले रहे हैं। वहीं, अब पटना में पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ दास के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई हुई है। सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट साझा करने के आरोप में शुक्रवार को उनके पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित आवास पर छापेमारी की गई।

सरकार से पुरानी है ‘रार’;
जानकारों का मानना है कि अमिताभ दास की सरकार से नाराजगी काफी पुरानी है। गौरतलब है कि साल 2018 में सरकार ने उन्हें सेवा के लिए ‘अयोग्य’ करार देते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति (जबरन रिटायरमेंट) दे दी थी। विभाग के भीतर यह चर्चा आम रही है कि उन्होंने कभी भी अपने वरीय पदाधिकारियों से अपना ACR (Annual Confidential Report) नहीं लिखवाया, क्योंकि वे कथित तौर पर सभी वरिष्ठ अधिकारियों को संदेहास्पद दृष्टि से देखते थे। उनके इस व्यवहार को आलोचक अब ‘मानसिक दिवालियापन’ की संज्ञा दे रहे हैं।

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खुद पर लगे हैं गंभीर आरोप;
हाल ही में नीट (NEET) मामले में सरकार पर ‘बलात्कारियों को संरक्षण’ देने का आरोप लगाने वाले अमिताभ दास खुद भी यौन शोषण जैसे संगीन आरोपों का सामना कर चुके हैं।
1) शबनम केस (2006): एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी की बेटी ने दास पर आरोप लगाया था कि जब वे जमुई में बीएमपी-11 के कमांडेंट थे, तब उन्होंने शादी का झांसा देकर लगभग 8-9 वर्षों तक उसका यौन शोषण किया।
2) विदेशी महिला से छेड़छाड़: देवघर में एसपी के पद पर तैनाती के दौरान भी उन पर एक विदेशी महिला के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा था।

राजकीय प्रतीकों का अवैध उपयोग: कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी?
रिटायरमेंट के बावजूद अमिताभ दास द्वारा अपने निजी लेटर पैड पर ‘IPS’ और भारत सरकार के राजकीय चिह्न (Emblem) का उपयोग करने का मामला तूल पकड़ रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह कृत्य निम्नलिखित कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है:
1) भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम, 2005
2) द स्टेट एम्बलेम ऑफ इंडिया (रेगुलेशन ऑफ यूज) रूल्स, 2007

बता दें कि बिना किसी अधिकार के सरकारी प्रतीकों का उपयोग करना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन भी है। अब देखना यह है कि प्रशासन उनके इन कृत्यों और बयानों पर क्या ठोस कार्रवाई करता है।

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