
पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर के चर्चित खुशी अपहरण मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह अब तक की जांच की पूरी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर सौंपे। सीबीआई को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि लापता बच्ची खुशी को तलाशने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।
वर्तमान में जांच मुख्य आरोपी अमन पर ही ठहर सी गई है। मोतिहारी जिले के चकिया निवासी अमन की बाइक पर ही खुशी को गायब होने वाले दिन आखिरी बार देखा गया था। अगली सुनवाई ठीक दो हफ्ते बाद होगी।गौरतलब है कि पटना हाईकोर्ट के आदेश पर ही पिछले तीन साल से अधिक समय से यह मामला सीबीआई की जांच में है। खुशी के परिवार की ओर से सीनियर अधिवक्ता ओम प्रकाश ने कोर्ट में महत्वपूर्ण दावा पेश किया। उन्होंने बताया कि एक अहम ऑडियो रिकॉर्डिंग को जांच के दायरे में नहीं लिया गया है। इस रिकॉर्डिंग में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि खुशी मुजफ्फरपुर और पटना के बीच कहीं है, और महज दो लाख रुपये खर्च करके उसका सुराग लगाया जा सकता है। इसके बावजूद सीबीआई ने इस क्लू पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
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दरअसल, यह मामला करीब पांच साल पुराना है। मुजफ्फरपुर शहर के लक्ष्मी चौक में सब्जी बेचने वाले राजा साह की चार साल की बेटी खुशी सरस्वती पूजा के पंडाल से अचानक गायब हो गई थी। शुरुआती जांच में बैरिया थाना पुलिस ने चकिया के अमन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला। फिलहाल अमन हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर है। इस स्थिति में सीबीआई उसे रिमांड पर नहीं ले सकती। हालांकि, सीबीआई ने अमन की जमानत रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की हुई है। वहीं, परिवार और समाज अब भी उम्मीद लिए हुए है कि जल्द ही मासूम खुशी को सुरक्षित ढूंढ लिया जाएगा।
