
बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत और उसके बाद हुए सनसनीखेज खुलासों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और सीबीआई (CBI) ने आधिकारिक तौर पर इस केस को अपने हाथ में ले लिया है।
स्पेशल केस नंबर 7S/26 के तहत शुरू हुई जांच
राज्य सरकार के विशेष आग्रह के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इसे ‘स्पेशल केस’ के रूप में दर्ज किया है। इस केस का नंबर 7S/26 रखा गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार सीबीआई के अधिकारी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने और ब्रीफिंग के लिए दिल्ली रवाना हो गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता की मांग और न्याय की पारदर्शिता को देखते हुए इस मामले की सिफारिश भारत सरकार से की थी।
यौन हिंसा की पुष्टि और पुलिस की थ्योरी
पटना पुलिस की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। आईजी जितेंद्र राणा और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई थी, जिससे दुष्कर्म की संभावना को बल मिला। हालांकि, पुलिस द्वारा 18 संदिग्धों के DNA सैंपल लिए गए थे, लेकिन किसी का भी मिलान नहीं हो सका, जिसके बाद जांच की दिशा भटकती नजर आ रही थी।
हॉस्टल से अस्पताल तक का रहस्य
CCTV फुटेज: शंभू गर्ल्स हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज में छात्रा 5 जनवरी को अपनी सहेली के साथ कमरे में जाती दिखी थी, लेकिन उसके बाद वह बाहर नहीं आई।
लापरवाही: एसएसपी ने माना कि चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ (SHO) स्तर पर भारी लापरवाही हुई थी, जिसके बाद उन पर कार्रवाई की गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: शुरुआत में पुलिस इसे सुसाइड मान रही थी, लेकिन पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने मामले को हत्या और दुष्कर्म की ओर मोड़ दिया।
CBI से न्याय की उम्मीद
छात्रा के परिवार और आम जनता में पुलिस की जांच को लेकर असंतोष था। अब सीबीआई द्वारा केस टेकओवर करने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि हाई-प्रोफाइल तकनीकी जांच के जरिए असली गुनहगारों तक पहुंचा जा सकेगा। सीबीआई अब हॉस्टल के रिकॉर्ड, जब्त किए गए कपड़ों और अस्पताल की ‘लामा’ रिपोर्ट को नए सिरे से खंगालेगी।

