
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के बीच पटना जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। मसौढ़ी प्रखंड में तैनात पंचायत सचिव रमाकांत गिरी पर 1 करोड़ 6 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि के गबन का गंभीर आरोप लगा है। जिलाधिकारी की लंबी जांच और निर्देशों के बाद अब आरोपी सचिव के खिलाफ मसौढ़ी थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला वित्तीय वर्ष 2020-21 से जुड़ा है। उस दौरान आरोपी रमाकांत गिरी मोकामा प्रखंड में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके पास कुल 15 पंचायतों का प्रभार था। नियमतः इन पंचायतों में 15वीं वित्त आयोग के तहत विकास कार्य होने थे, जिनमें नल-जल योजना, पक्की नाली-गली निर्माण, पंचायत सरकार भवन और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल थे।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
जिलाधिकारी पटना द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच में यह पाया गया कि योजनाओं के नाम पर राशि तो निकाली गई, लेकिन उसका कोई हिसाब-किताब विभाग को नहीं दिया गया। जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
लेखा-जोखा का अभाव: गबन की गई कुल राशि 1,06,44,321 रुपये है, जिसका न तो ऑडिट कराया गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि यह पैसा कहाँ खर्च हुआ।
असहयोग और लापरवाही: जांच के दौरान पंचायत सचिव ने अधिकारियों का सहयोग नहीं किया और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया।
अनुशासनहीनता: सरकारी दायित्वों के निर्वहन में भारी लापरवाही और विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना की पुष्टि हुई है।
डीएम का सख्त रुख: सेवा से बर्खास्तगी का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम पटना ने न केवल प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया, बल्कि रमाकांत गिरी को सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा भी की। वर्तमान में आरोपी सचिव मसौढ़ी की रेवां पंचायत में कार्यरत थे। दिलचस्प बात यह है कि उनके खिलाफ बख्तियारपुर प्रखंड में भी इसी तरह की वित्तीय अनियमितताओं के सुराग मिले हैं, जिसकी जांच स्थानीय बीडीओ द्वारा की जा रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई और संदेश
मसौढ़ी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) प्रभाकर कुमार ने थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस अब इस पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है। प्रशासन का कहना है कि पंचायत स्तर पर सरकारी धन की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। यह घटना दर्शाती है कि पंचायत स्तर पर अभी भी वित्तीय पारदर्शिता की भारी कमी है, जिसके कारण विकास की राशि आम जनता तक पहुँचने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों की भेंट चढ़ रही है।