
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही हंगामेदार रही। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला। पैर में चोट के कारण व्हीलचेयर पर सदन पहुँचे तेजस्वी ने बैठकर बोलने की अनुमति ली और करीब एक घंटे तक अपराध, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नीतीश सरकार की बखिया उधेड़ी।
‘लोक हारा और तंत्र जीता’
तेजस्वी यादव ने चुनावी नतीजों पर तंज कसते हुए कहा कि इस बार चुनाव में ‘लोक’ (जनता) हार गई और ‘तंत्र’ (प्रशासन) जीत गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार प्रशासन के बल पर सत्ता में आई है। उन्होंने कहा, “सरकार की दो ही पहचान रह गई हैं—पहली झूठी वाहवाही और दूसरी पूरी लापरवाही। 20 साल से सत्ता में रहने के बावजूद बिहार आज भी विकास के पायदान पर वहीं खड़ा है जहाँ 1961 में था।”
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कानून-व्यवस्था पर शायरी से प्रहार
राज्य में बढ़ते अपराध, विशेषकर नीट (NEET) छात्रा हत्याकांड और मुजफ्फरपुर-खगड़िया की घटनाओं का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि बिहार में अब ‘कानून का राज’ नहीं बल्कि ‘गनतंत्र’ है। उन्होंने सरकार की निष्क्रियता पर कटाक्ष करते हुए कहा: “थाना खामोश है, प्रशासन बेहोश है और सरकार मदहोश है।” सत्ता पक्ष को चेतावनी देते हुए उन्होंने शायरी के अंदाज में कहा, “कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं, सही वक्त आने पर उन्हें उनकी हदों का एहसास करवा देंगे। आपका समय है, हमारा दौर आएगा।”
गरीबी और विशेष दर्जे का मुद्दा
तेजस्वी ने नीति आयोग की रिपोर्टों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर बिहार विकास कर रहा है, तो वह शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी में सबसे फिसड्डी क्यों है? उन्होंने कहा कि अगर बिहार एक स्वतंत्र देश होता, तो वह दुनिया का सबसे गरीब देश कहलाता। विशेष राज्य के दर्जे पर मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार इस मांग के लिए सड़क पर उतरते हैं, तो विपक्ष उनके साथ खड़ा रहेगा।
भ्रष्टाचार और आरक्षण पर घेराबंदी
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने भाजपा को आरक्षण विरोधी बताते हुए कहा कि बजट में केवल महागठबंधन के वादों की नकल की गई है। उन्होंने 10 लाख नौकरियों के वादे को दोहराते हुए कहा कि यह महागठबंधन की ही देन थी जिसे वर्तमान सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है। अंत में उन्होंने स्वाभिमान का कार्ड खेलते हुए कहा कि उन्हें भाजपा की शर्तों पर ‘सुल्तान’ बनना मंजूर नहीं था, क्योंकि वे अपने विचार और जमीन का सौदा नहीं करते।
