Union Budget 2026-27: बिहार को विशेष पैकेज तो नहीं, पर मिला ₹1.62 लाख करोड़ का आधार; 9 बिंदुओं में समझें भविष्य का रोडमैप
दिल्ली,विशेष पैकेज

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 ने बिहार की उम्मीदों और हकीकत के बीच एक नया सेतु बनाने की कोशिश की है। हालांकि इस बार भी बिहार को किसी ‘विशेष पैकेज’ की सौगात नहीं मिली, लेकिन आंकड़ों के गणित में राज्य को कुल 1,62,142 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से की है, जो करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये है। यह बजट तात्कालिक लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर केंद्रित नजर आता है।
बजट 2026-27: बिहार के विकास के 9 मुख्य आधार
आर्थिक रीढ़ को मजबूती: ₹1.62 लाख करोड़ की भारी-भरकम राशि से राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास की चल रही योजनाओं को वित्तीय स्थिरता मिलेगी।
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गंगा बनेगी ‘आर्थिक गलियारा’: इनलैंड वाटर वे (जलमार्ग) पर जोर देने से बिहार के कृषि उत्पाद और औद्योगिक माल अब सस्ते में कोलकाता बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे।
पटना में शिप रिपेयर हब: गंगा नदी के किनारे जहाज मरम्मत और रखरखाव का इकोसिस्टम विकसित होगा, जिससे पटना और आसपास के जिलों में नए रोजगार पैदा होंगे।
वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल: बिहार से गुजरने वाला यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर भारत और उत्तर प्रदेश के बीच व्यापारिक सेतु का काम करेगा, जिससे कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
8 शहरों का कायाकल्प: पटना, गया और मुजफ्फरपुर समेत 8 प्रमुख शहरों को ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (CER) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे शहरी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
सीधा पंचायत फंड: वित्त आयोग के जरिए पंचायतों और नगर निकायों को मिलने वाला सीधा फंड स्थानीय स्तर पर नली-गली और सफाई जैसे बुनियादी कामों में तेजी लाएगा।
MSME के लिए ₹10,000 करोड़: छोटे उद्यमियों के लिए सस्ता कर्ज उपलब्ध होने से बिहार के टियर-2 शहरों में स्टार्टअप और लघु उद्योगों की बाढ़ आ सकती है।
स्किलिंग और रोजगार: ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास के लिए विशेष प्रोफेशनल सपोर्ट मॉडल से पलायन रोकने में मदद मिल सकती है।
रणनीतिक निवेश: कोई एक बड़ा पैकेज न देकर केंद्र ने इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम आधारित सपोर्ट पर दांव लगाया है, जिसका असर अगले कुछ वर्षों में दिखने की उम्मीद है।
चुनौती अब क्रियान्वयन की
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट बिहार को ‘भावनात्मक’ नहीं बल्कि ‘आर्थिक’ ढांचा दे रहा है। विशेष पैकेज की कमी खलेगी, लेकिन जो अवसर मिले हैं, उन्हें धरातल पर उतारना अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल और गंगा इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स बिहार की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाने की दिशा में बड़े कदम हैं।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 बिहार के लिए “धीमी लेकिन स्थायी प्रगति” का संकेत देता है, बशर्ते केंद्र और राज्य के बीच योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल बना रहे।
