
उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ (RLM) में मची संभावित बगावत को शांत करने के लिए संगठन में बड़ा दांव खेला है। विधायकों की नाराजगी और टूट की खबरों के बीच, कुशवाहा ने पार्टी की कमान नए चेहरों को सौंपकर न केवल असंतोष को थामने की कोशिश की है, बल्कि 2025 के चुनावी नतीजों के बाद एक नया सामाजिक समीकरण भी तैयार किया है। हालांकि, चौथी विधायक उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता हैं, जो पार्टी की सचेतक (Whip) भी हैं। ऐसे में परिवारवाद के आरोपों और विधायकों की उपेक्षा की खबरों के बीच, यह फेरबदल संगठन में ‘पावर बैलेंस’ बनाने की एक गंभीर कोशिश है।
संगठन में नई नियुक्तियां;
1) आलोक सिंह (विधायक, दिनारा): पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए।
2) प्रशांत पंकज एवं सुभाष चंद्रवंशी: इन्हें प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
3) हिमांशु पटेल: प्रदेश प्रधान महासचिव बनाए गए।
4) मदन चौधरी: इन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद दिया गया है।
पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।
बगावत की आग को बुझाने की रणनीति;
बिहार विधानसभा चुनाव में RLM ने 4 सीटें जीती थीं। इनमें से 3 विधायक(आलोक सिंह, माधव आनंद और एक अन्य) पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे। नाराजगी की मुख्य वजह उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश सरकार में मंत्री बनाया जाना था। नाराज विधायकों की दिल्ली में हुई गुप्त बैठक के बाद पार्टी में टूट तय मानी जा रही थी। माधव आनंद पहले से ही विधायक दल के नेता हैं और अब आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कुशवाहा ने विद्रोह की संभावना को फिलहाल टाल दिया है।
कुशवाहा-राजपूत समीकरण और क्षेत्रीय पकड़;
उपेंद्र कुशवाहा (कुशवाहा समाज) खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जबकि आलोक सिंह (राजपूत समाज) को प्रदेश की कमान देकर पार्टी ने ‘लव-कुश’ के साथ उच्च जातियों को जोड़ने का संदेश दिया है। आलोक सिंह शाहाबाद क्षेत्र से आते हैं। इस नियुक्ति के जरिए पार्टी उस इलाके में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है जहां विपक्षी दल काफी सक्रिय हैं