
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह अपने दो दिवसीय दौरे पर मुंगेर पहुंचे। सोमवार को सर्किट हाउस में जिला प्रशासन द्वारा उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और अपनी हालिया इजराइल यात्रा के रणनीतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। ललन सिंह ने बताया कि भारत और इजराइल के बीच मत्स्य पालन के क्षेत्र में तकनीक के आदान-प्रदान को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है।
प्रधानमंत्री के विजन को इजराइल में मिली सराहना
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर इजराइल में आयोजित मत्स्य पालन सेमिनार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गए थे। उन्होंने वहां वैश्विक मंच पर भारत की सफलता की कहानी साझा की। ललन सिंह ने कहा, “पिछले 10 वर्षों में भारत का मत्स्य उत्पादन दोगुना हो गया है। विशेषकर उन राज्यों में क्रांतिकारी बदलाव आया है जहां समुद्र नहीं है। इजराइल के कृषि मंत्री और वहां मौजूद अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।”
तकनीक का होगा आदान-प्रदान
इजराइल और भारत के बीच हुए समझौते के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दोनों देशों ने हाथ मिलाया है। इजराइल की उन्नत तकनीक अब भारतीय मत्स्यपालकों को मिलेगी, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि निर्यात के अवसरों में भी वृद्धि होगी। उन्होंने और इजराइल के कृषि मंत्री ने इस साझा सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
बिहार: मछली उत्पादन में ‘आत्मनिर्भर’ से ‘निर्यात’ तक का सफर
बिहार की प्रगति पर चर्चा करते हुए ललन सिंह ने पुरानी सरकारों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिहार 95 प्रतिशत मछलियों के लिए आंध्र प्रदेश पर निर्भर था। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में बिहार न केवल आत्मनिर्भर बना है, बल्कि अब पड़ोसी राज्यों को भी मछली भेज रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि ‘सात निश्चय फेज-2’ के तहत पशुपालन और मत्स्य पालन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। राज्य में विकास की गति तेज करने के लिए अलग मंत्रालय और बुनियादी ढांचे पर काम हो रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बिहार के इन प्रयासों में हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।


