
बिहार के बक्सर जिले का नवानगर प्रखंड, जिसे कभी राज्य के औद्योगिक विकास के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा था, आज एक गहरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार की नई एथेनॉल नीति के कारण यहां स्थापित एथेनॉल फैक्ट्री के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे उद्यमी और हजारों मजदूर परिवार संकट में हैं।
केंद्र सरकार की नई एथेनॉल नीति:
बिहार वर्तमान में सालाना लगभग 80 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन कर रहा है। संकट की मुख्य वजह वित्तीय वर्ष 2026 के टेंडर में किए गए बदलाव हैं। दरअसल,नए टेंडर में कई नए प्लांट्स को शामिल कर लिया गया है। इसके परिणामस्वरूप पुराने प्लांट्स को मिलने वाला सप्लाई ऑर्डर उनकी क्षमता का मात्र आधा (50%) रह गया है। केंद्र सरकार अब केवल 6 महीने के लिए एथेनॉल खरीद रही है। इसके साथ ही प्लांट के सीएमडी अजय सिंह का कहना है कि 50% क्षमता पर प्लांट चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा है। बिजली, मजदूरी और कच्चे माल का खर्च आधा उत्पादन करके निकालना असंभव है।
मुख्यमंत्री के आश्वासन और जमीनी हकीकत:
कुछ समय पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नवानगर का दौरा कर इसे एक ‘इंडस्ट्रियल हब’ बनाने का भरोसा दिया था। सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी से किसानों और युवाओं में उम्मीद जगी थी, लेकिन मौजूदा नीतिगत बदलावों ने इन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। उद्यमियों का मानना है कि बिहार के स्थापित प्लांट्स को दरकिनार कर अन्य राज्यों के नए प्लांट्स को प्राथमिकता देना राज्य के साथ अन्याय है।
बता दें, नवानगर कृषि आधारित क्षेत्र रहा है। फैक्ट्री आने से स्थानीय युवाओं को लगा था कि अब उन्हें रोजी-रोटी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन अब पलायन का डर फिर से सताने लगा है। वहीं, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सैकड़ों मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, एथेनॉल इकाइयों से कृषि उत्पादों की खपत बढ़ने की जो उम्मीद थी, वह अब धूमिल होती दिख रही है।
नवानगर की यह फैक्ट्री केवल एक व्यावसायिक इकाई नहीं, बल्कि बिहार के औद्योगिक गौरव का प्रतीक थी। स्थानीय लोगों और उद्यमियों की मांग है कि:
– सरकार एथेनॉल खरीद नीति पर तत्काल पुनर्विचार करे।
– बिहार के प्लांट्स को उनकी पूर्ण उत्पादन क्षमता के आधार पर कोटा दिया जाए।
– अस्थायी राहत के लिए सरकार विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे।
“अगर सरकार पूरा माल नहीं खरीदेगी, तो हमारा पूरा निवेश बर्बाद हो जाएगा। हमने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पूर्ण क्षमता के ऑर्डर की मांग की है।” — अजय सिंह, सीएमडी (नवानगर एथेनॉल फैक्ट्री)

