
बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का मामला अब एक संगीन आपराधिक साजिश में तब्दील हो गया है। जिस मामले को पटना पुलिस शुरुआत में ‘नींद की गोलियों’ और ‘बीमारी’ का रूप दे रही थी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन तमाम दावों की पोल खोल दी है। पटना एसएसपी ने आधिकारिक पुष्टि की है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) हुआ था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने जांच की दिशा बदलते हुए हॉस्टल मालिक को हिरासत में ले लिया है।
90 गोलियों का रहस्य: परिजनों ने पुलिस को घेरा
मृतका के मामा सुभाष कुमार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 11 तारीख को मौत से पहले ही पुलिस ने इसे ‘सुसाइड’ कैसे घोषित कर दिया? पुलिस ने दावा किया था कि छात्रा के कमरे से नींद की 90 गोलियां मिली हैं। परिजनों का तर्क है कि बिना डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के कोई भी मेडिकल स्टोर इतनी बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां नहीं देता। परिजनों का सीधा आरोप है कि यह गैंगरेप और हत्या का मामला है, जिसे आत्महत्या का रंग देने के लिए गोलियों की कहानी गढ़ी गई।
15 लाख का ऑफर और प्रशासनिक ‘साजिश’
परिजनों ने मामले में बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, स्थानीय पुलिस (SHO), अस्पताल प्रबंधन और हॉस्टल मालिक ने मिलकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। मामा का दावा है कि छात्रा के परिवार को चुप रहने के लिए 15 लाख रुपये तक का ऑफर दिया गया था। परिजनों ने प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और स्थानीय थाना प्रभारी पर साक्ष्य मिटाने और दोषियों को बचाने का आरोप लगाते हुए अब सीजेएम (CJM) कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
मोबाइल फोन खोलेगा राज, FSL टीम तैनात
पटना एसएसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रा का मोबाइल फोन FSL (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) को भेज दिया गया है। पुलिस को संदेह है कि मोबाइल से कुछ महत्वपूर्ण संदेश या फोटो डिलीट किए गए हैं, जो घटना की रात का सच उगल सकते हैं। छात्रा 5 तारीख को पटना आई थी और 6 तारीख को ही अचेत अवस्था में मिली, जिससे यह स्पष्ट है कि वारदात हॉस्टल के भीतर ही हुई।
न्याय की उम्मीद और जनाक्रोश
जहानाबाद से लेकर पटना तक इस घटना को लेकर लोगों में भारी उबाल है। पीड़िता के पिता ने साफ कर दिया है कि वे अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए हाई कोर्ट तक की लड़ाई लड़ेंगे। रसूखदारों को बचाने की कोशिशों के आरोपों के बीच अब सबकी नजरें FSL रिपोर्ट और कोर्ट के हस्तक्षेप पर टिकी हैं।

