
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और बदहाली के चलते दो मासूम बच्चियों को सौदे का शिकार बना दिया गया। यह घटना सकरा थाना क्षेत्र की है, जहां पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त कार्रवाई में दो बच्चियों को रेस्क्यू किया गया। यह मामला तब सामने आया, जब यह जानकारी मिली कि एक चाय बेचने वाली महिला की मध्यस्थता से एक 6 साल की बच्ची को महज 20 हजार रुपये में “गोद लेने” के नाम पर बेचा गया था।
रेस्क्यू की गई बच्चियों का पिता कुछ समय पहले निधन हो चुका था, और उनकी मां ने तीनों बच्चों (दो बहनें और एक भाई) को ननिहाल में छोड़ दिया था। फिर वह उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति से दूसरी शादी कर बैठी। ननिहाल में बच्चों के लिए आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी, जिससे उनकी परवरिश में काफी मुश्किलें आ रही थीं। इस स्थिति का फायदा उठाकर मझौलिया गांव के एक निःसंतान दंपत्ति ने चाय दुकानदार महिला के जरिए 20 हजार रुपये में एक बच्ची को अपने साथ ले लिया।
इस बच्ची को गोद लेने के बाद उसकी स्थिति बिगड़ने लगी। उसे पिता का स्नेह तो मिला, लेकिन महिला की ओर से उसे अक्सर मारपीट का सामना करना पड़ा। प्रताड़ना से तंग आकर बच्ची कई बार घर से भागकर सड़कों पर भटकती हुई पाई गई। स्थानीय लोगों ने भी इस पर ध्यान दिया, और फिर मामला पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंचा। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए बच्ची और उसकी दूसरी बहन (जिसे ननिहाल के एक अन्य रिश्तेदार ने रखा था) को रेस्क्यू कर लिया।
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्चियों को फिलहाल श्रम संसाधन विभाग के संरक्षण में रखा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक सीधा मामला है जिसमें बच्चियों की खरीद-बिक्री की गई थी। प्रशासन अब पीड़ित परिवार को समाज कल्याण विभाग की योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया में है और पुनर्वास के लिए 25 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की योजना बना रहा है। पुलिस इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


