
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों को अभी महज दो महीने ही बीते हैं, लेकिन राज्य की सियासत में एक बार फिर ‘खेला’ होने के संकेत मिल रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बीच बिहार का सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब यह खबर आई कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के कुल 9 विधायक पाला बदलने की तैयारी में हैं। पटना से लेकर दिल्ली तक जारी इस हलचल ने महागठबंधन की चिंता बढ़ा दी है, तो वहीं एनडीए के भीतर वर्चस्व की एक नई लड़ाई छेड़ दी है।
कांग्रेस के सभी 6 विधायक JDU के राडार पर?
सबसे चौंकाने वाली खबर कांग्रेस खेमे से आ रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार में कांग्रेस के सभी छह विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) के संपर्क में हैं।
• वजूद पर संकट: यदि ये छह विधायक एक साथ पाला बदलते हैं, तो विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
• नाराजगी की वजह: बताया जा रहा है कि ये विधायक पार्टी की वर्तमान कार्यप्रणाली और नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। पटना के सदाकत आश्रम में आयोजित हालिया ‘दही-चूड़ा’ भोज से इन विधायकों की दूरी ने इन अटकलों को और पुख्ता कर दिया है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है।
NDA में वर्चस्व की होड़: BJP और JDU के बीच ‘नंबर गेम’
सत्ताधारी गठबंधन (NDA) के पास भले ही प्रचंड बहुमत है, लेकिन गठबंधन के भीतर ‘बड़े भाई’ की भूमिका को लेकर भाजपा और जदयू में खींचतान शुरू हो गई है।
• भाजपा की रणनीति: उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ (RLM) में बड़ी टूट के संकेत हैं। पार्टी के चार में से तीन विधायक (रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह) भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। ये विधायक कुशवाहा द्वारा अपने बेटे को कैबिनेट में शामिल करने (परिवारवाद) से नाराज हैं। भाजपा इन विधायकों को अपने साथ जोड़कर सदन में अपनी संख्या (वर्तमान 89) को और मजबूत करना चाहती है।
• जदयू की चाल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजर कांग्रेस के विधायकों पर है ताकि उनकी संख्या भाजपा से अधिक हो जाए और गठबंधन में उनका दबदबा बना रहे।
RCP सिंह की वापसी और नए समीकरण
बिहार की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जदयू में संभावित वापसी को लेकर है। जन सुराज के साथ चुनाव लड़ने वाले सिंह की हाल ही में एक कुर्मी सम्मेलन में नीतीश कुमार के साथ परोक्ष मौजूदगी ने ‘घर वापसी’ के संकेतों को बल दिया है। यदि आरसीपी वापस आते हैं, तो जदयू का संगठन और मजबूत हो सकता है।
फिलहाल बिहार विधानसभा में छोटे दलों जैसे AIMIM (5 सीटें) और BSP (1 सीट) पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। एनडीए के भीतर सर्वोच्चता की यह लड़ाई और विपक्ष में टूट की संभावना ने बिहार की राजनीति को एक अस्थिर लेकिन दिलचस्प मोड़ पर खड़ा कर दिया है। यदि यह ‘ऑपरेशन दलबदल’ सफल होता है, तो सदन का शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा।
