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आखिर 26 जनवरी तक दिल्ली की चीलों को क्यों खिलाया जा रहा है ‘शाही दावत’? इस 1275 किलो चिकन के पीछे का सच हिला देगा!.

बिहार,शाही दावत

गणतंत्र दिवस के मौके पर जब आसमान में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान अपनी गर्जना से दुश्मनों का दिल दहलाते हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीन पर एक बेहद दिलचस्प और अनूठी मुहिम चलती है। इसे बोलचाल की भाषा में ‘परिंदों की दावत’ कहा जा सकता है।

क्यों दी जाती है परिंदों को ‘पार्टी’?
दिल्ली के आसमान में, खासकर पुराने दिल्ली के इलाकों में चीलों (Black Kites) का भारी जमावड़ा रहता है। गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान जब विमान कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं, तो इन पक्षियों से टकराने का खतरा (Bird Strike) बढ़ जाता है। एक छोटा सा पक्षी भी तेज रफ्तार विमान के इंजन को फेल कर सकता है। इसी जोखिम को टालने के लिए प्रशासन चीलों को आसमान से नीचे जमीन पर बुलाने की योजना बनाता है।

इस साल की रणनीति में बड़े बदलाव:
प्रशासन ने इस बार सुरक्षा और प्रबंधन को देखते हुए कुछ अहम बदलाव किए हैं:-
– मेनू में बदलाव: पहले चीलों को भैंस का मांस दिया जाता था, लेकिन इस साल पहली बार बोनलेस चिकन परोसा जा रहा है।
– वजह: चिकन हल्का होता है, चीलों को पसंद आता है और वे इसे जल्दी खा लेती हैं, जिससे वे एक ही जगह टिकी रहती हैं।
– मात्रा और समय: यह अभियान 15 जनवरी से 26 जनवरी तक चलता है। कुल 1,275 किलो चिकन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे अलग-अलग चरणों में बांटा गया है।

कहां और कैसे चलती है यह मुहिम?
वायुसेना और वन विभाग ने दिल्ली के 20 सबसे संवेदनशील इलाकों को चिन्हित किया है, जिनमें शामिल हैं:-
1) लाल किला और जामा मस्जिद क्षेत्र
2) मंडी हाउस और दिल्ली गेट
3) मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट के आसपास के इलाके
हालांकि,इन जगहों पर रोजाना लगभग 20 किलो चिकन के छोटे-छोटे टुकड़े (20-30 ग्राम) फेंके जाते हैं। इसका मकसद चीलों का पेट जमीन के पास ही भरना है ताकि फ्लाईपास्ट के समय वे ऊपर न उड़ें।

इस योजना के फायदे:
– राष्ट्रीय सुरक्षा: वायुसेना के विमान और पायलट सुरक्षित रहते हैं।
– जीव संरक्षण: पक्षियों को भगाने के लिए उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाता, बल्कि उन्हें खाना दिया जाता है।
– सटीक फ्लाईपास्ट: बिना किसी बाधा के देश अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर पाता है।

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