
मकर संक्रांति के अवसर पर दिल्ली में आयोजित दही-चूड़ा भोज के दौरान सियासी तापमान तब बढ़ गया, जब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। चिराग ने बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की कार्यशैली और कांग्रेस के भीतर चल रही उठापटक को लेकर कई ऐसी बातें कहीं, जिसने महागठबंधन की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेजस्वी की ‘100 दिनों की चुप्पी’ पर तंज
हाल ही में तेजस्वी यादव ने घोषणा की थी कि वे अगले 100 दिनों तक मौन रहेंगे। इस पर पलटवार करते हुए चिराग पासवान ने कहा, “लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका जनता की आवाज बनने की होती है। अगर आपको खामोश ही रहना था, तो आपको नेता प्रतिपक्ष की गरिमापूर्ण कुर्सी छोड़ देनी चाहिए थी।” उन्होंने आगे कहा कि जनता ने उन्हें मुद्दों पर लड़ने के लिए चुना है, न कि चुप्पी साधने के लिए। चिराग के इस बयान को तेजस्वी की राजनीतिक सक्रियता पर एक बड़ा कटाक्ष माना जा रहा है।
कांग्रेस के 6 विधायकों पर बड़ा दावा
कांग्रेस के दही-चूड़ा भोज से पार्टी के 6 विधायकों की अनुपस्थिति को चिराग ने ‘असंतोष की चिंगारी’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और राजद के कई विधायक अपनी पार्टियों के नेतृत्व से नाराज हैं और वे लगातार एनडीए के संपर्क में हैं। चिराग ने चुटकी लेते हुए कहा, “जब अपनी ही पार्टी के कार्यक्रम में विधायक नहीं पहुंच रहे, तो यह स्पष्ट है कि बिहार में पाला बदलने की तैयारी चल रही है।” सूत्रों का भी मानना है कि ये विधायक जल्द ही एनडीए का दामन थाम सकते हैं।
भाषा विवाद और बंगाल पर वार
चिराग पासवान ने केवल बिहार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने भाषा के नाम पर क्षेत्रवाद फैलाने वाले नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भारतीय भाषाएं एक-दूसरे की सहेलियां हैं। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि “अगर कुछ छुपाने को नहीं है, तो ममता सरकार जांच एजेंसियों से इतनी डरी हुई क्यों है?”
