टॉप न्यूज़बिहार

तेजस्वी के ‘मौन व्रत’ पर गिरिराज सिंह का करारा हमला, कहा- “बाप-बेटा मौनी बाबा बनकर करें पापों का प्रायश्चित”

बिहार,गिरिराज सिंह

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में आया उबाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। महागठबंधन की करारी हार के बाद करीब 40 दिनों तक अज्ञातवास पर रहे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आखिरकार पटना लौट आए हैं। लेकिन, उनकी वापसी के साथ ही उनके एक बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। तेजस्वी यादव ने मीडिया से दूरी बनाते हुए कहा कि उन्होंने ‘100 दिनों तक चुप रहने का संकल्प’ लिया है। तेजस्वी के इसी “मौन व्रत” पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने तीखा तंज कसा है।

“मौनी बाबा बनकर करें प्रायश्चित” – गिरिराज सिंह
बेगूसराय पहुँचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तेजस्वी यादव की चुप्पी पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह मौन किसी संकल्प का नहीं बल्कि हार की हताशा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव को वास्तव में मौनी बाबा बन जाना चाहिए। उन्हें अपने पिता लालू प्रसाद यादव के साथ बैठकर उन तमाम कार्यों के लिए प्रायश्चित करना चाहिए, जो उन्होंने बिहार की सत्ता में रहते हुए किए थे। बाप-बेटा को 100 दिन नहीं, बल्कि लंबे समय तक मौन रहकर प्रायश्चित करना चाहिए।”

संजय सरावगी ने भी घेरा: “जनता ने कर दिया सूपड़ा साफ”
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी तेजस्वी यादव की गंभीरता पर सवाल उठाए। सरावगी ने कहा कि बिहार की जनता ने हालिया चुनाव में राजद का सूपड़ा साफ कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद तेजस्वी यादव अपनी जिम्मेदारी के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा था, विधायक पद की शपथ लेनी थी, लेकिन तेजस्वी पटना से गायब होकर विदेश यात्रा पर चले गए। जब राज्य में बाढ़ या अन्य गंभीर मुद्दे आते हैं, तब नेता प्रतिपक्ष का लापता होना उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।

चुनावी हार के बाद ‘अज्ञातवास’ पर थे तेजस्वी
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत और राजद की दुर्गति के बाद तेजस्वी यादव पत्नी राजश्री के साथ बिहार छोड़कर चले गए थे। करीब 40 दिनों तक वह कहाँ थे, इसकी जानकारी उनकी पार्टी के पास भी स्पष्ट रूप से नहीं थी। मकर संक्रांति (14 जनवरी) से ठीक पहले 11 जनवरी को जब वे पटना एयरपोर्ट पहुँचे, तो उम्मीद थी कि वे अपनी हार और भविष्य की रणनीति पर कुछ बोलेंगे। लेकिन तेजस्वी ने केवल इतना कहा, “मैंने 100 दिन नहीं बोलने का संकल्प लिया है।”

अब सत्ता पक्ष का मानना है कि तेजस्वी का यह मौन राजनीतिक हार को पचाने की एक कोशिश है, जबकि राजद समर्थक इसे आत्मचिंतन का दौर बता रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!