
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव दिल्ली का अपना दौरा पूरा कर पटना लौट आए हैं। हालांकि उनकी इस यात्रा को स्वास्थ्य लाभ और इलाज से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन इसके कानूनी और राजनीतिक मायने कहीं अधिक गहरे हैं। विशेष रूप से तब, जब दिल्ली की एक अदालत ने ‘लैंड फॉर जॉब’ (जमीन के बदले नौकरी) मामले में उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इस घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ का पूरा खेल?
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे के मुंबई, कोलकाता, जबलपुर और जयपुर जोन में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियों के लिए स्थापित नियमों और विज्ञापनों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, परदे के पीछे एक सोची-समझी साजिश चल रही थी। नौकरी पाने के बदले में अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने अपनी कीमती जमीनें लालू परिवार के सदस्यों—राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव—के नाम कर दीं। कागजों पर इन जमीनों की कीमत महज कुछ लाख रुपये दिखाई गई, जबकि बाजार में इनका मूल्य करोड़ों में था। पहले इन युवाओं को अस्थायी नौकरी दी गई और जैसे ही जमीन का हस्तांतरण पूरा हुआ, उन्हें स्थायी कर दिया गया।
जांच का दायरा: 7 से 78 हुए आरोपी
जब इस घोटाले की परतें खुलीं, तो सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसना शुरू किया। शुरुआत में पहली चार्जशीट में केवल 7 लोगों के नाम थे, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपियों की संख्या बढ़कर 78 हो गई। इसमें न केवल लालू परिवार के सदस्य, बल्कि वे 38 लोग भी शामिल हैं जिन्होंने जमीन देकर अवैध तरीके से नौकरियां हासिल की थीं।
600 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का दावा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का एक बड़ा जाल उजागर करने का दावा किया है। ईडी के अनुसार, लालू परिवार को सात प्रमुख स्थानों पर करीब 1.05 लाख वर्ग फीट से ज्यादा जमीन मिली। यह पूरी संपत्ति महज 26 लाख रुपये में खरीदी दिखाई गई, जबकि उस समय उसका वास्तविक मूल्य 4.39 करोड़ रुपये से अधिक था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा भ्रष्टाचार का खेल करीब 600 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट तक फैला हुआ है।
अब जब कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं, तो इस मामले का ट्रायल तेज होने की उम्मीद है, जो लालू यादव और उनके परिवार के लिए आने वाले समय में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

