
मादक पदार्थों के खिलाफ भारत की जंग में साल 2025 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा जारी वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में देश भर में संगठित ड्रग सिंडिकेट्स की कमर तोड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए। एजेंसी ने बताया कि साल 2025 के दौरान कुल 1.34 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1,980 करोड़ रुपये आंकी गई है।
तस्करों पर चौतरफा प्रहार: 994 गिरफ्तारियाँ
NCB की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने कुल 447 मामले दर्ज किए, जिसके तहत 994 ड्रग तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 25 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के साथ मिलकर भारत में नशे का जाल फैला रहे थे। न केवल गिरफ्तारियाँ बढ़ी हैं, बल्कि अदालत में तस्करों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) भी 2024 के 60.8% से बढ़कर 2025 में 67% हो गई है।
कड़ी सजा का संदेश: इस साल कुल 265 अपराधियों को जेल की सजा सुनाई गई, जिनमें से 39 को 20 साल की अधिकतम जेल की सजा मिली है। साथ ही, दोषियों पर कुल 3.3 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
प्रमुख ऑपरेशन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खात्मा
साल 2025 में NCB ने कई हाई-प्रोफाइल ऑपरेशनों के जरिए वैश्विक नेटवर्क को ध्वस्त किया:
ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस: दिल्ली में चलाया गया यह अभियान बेहद सफल रहा, जहाँ 328 किलो मेथाम्फेटामाइन जब्त की गई।
ऑपरेशन केटामेलन: डार्कनेट पर चल रहे भारत के सबसे बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें LSD ब्लॉट, केटामाइन और 70 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी बरामद हुई।
ऑपरेशन मेड मैक्स: इस मिशन ने चार महाद्वीपों और 10 से अधिक देशों में फैले अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल तस्करी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ दिया।
अवैध प्रयोगशालाओं और संपत्तियों पर कार्रवाई
NCB ने राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में चल रही 6 गुप्त लैब का पर्दाफाश किया। यहाँ मेफेड्रोन और केटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध उत्पादन हो रहा था। इसके अलावा, तस्करी से कमाई गई 96.69 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी फ्रीज किया गया है।
डिजिटल मदद और ग्लोबल कोऑर्डिनेशन
NCB की हेल्पलाइन ‘मानस’ (1933) को नागरिकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। करीब 1.19 लाख लोगों ने संपर्क किया, जिससे 110 महत्वपूर्ण मामले दर्ज करने में मदद मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इंटरपोल के माध्यम से रेड और ब्लू नोटिस जारी कर यूएई, श्रीलंका और मलेशिया से 5 भगोड़ों को भारत डिपोर्ट करवाया गया।
नशीले पदार्थों के खिलाफ इस जीरो टॉलरेंस नीति के तहत 2025 में कुल 77,773 किलोग्राम नशीले पदार्थों को सार्वजनिक रूप से नष्ट किया गया, जिसकी कीमत लगभग 3,889 करोड़ रुपये थी।