
बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल गांव के निवासी मुकेश सिंह ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर नियुक्ति प्राप्त की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी से नवाजा है। यह उनके गांव और जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है, जहां ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया और परिवार को बधाई दी।
मुकेश सिंह का करियर साहस, कर्तव्यनिष्ठा और संघर्ष का प्रतीक रहा है। उन्होंने अपनी पढ़ाई IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में की थी। हालांकि, देश सेवा की प्रेरणा ने उन्हें पुलिस सेवा में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। 1996 में आईपीएस परीक्षा पास करने के बाद वे जम्मू-कश्मीर कैडर में नियुक्त हुए और उनकी पहली पोस्टिंग पुंछ जिले में एएसपी के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने जम्मू, पुलवामा, रियासी जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में एसपी के रूप में कार्य किया।
मुकेश सिंह को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दो बार राष्ट्रपति द्वारा वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनका जीवन यह दर्शाता है कि कड़ी मेहनत, समर्पण और ईमानदारी से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
बेगूसराय के मंझौल गांव के इस बेटे ने अपनी शिक्षा बोकारो के सेंट जेवियर स्कूल और दिल्ली के आरके पुरम से की। इसके बाद उन्होंने IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और बोकारो स्टील प्लांट में दो साल तक काम किया, लेकिन देश सेवा की भावना ने उन्हें आईपीएस बनने के लिए प्रेरित किया।
मुकेश सिंह के चाचा अजय कुमार के अनुसार, उनकी मेहनत, ईमानदारी और काबिलियत ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे बेगूसराय जिले का नाम रोशन किया है। लद्दाख के DGP के रूप में उनकी नियुक्ति उनके लिए एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो उनकी सेवाओं का सम्मान है।
उनकी यह उपलब्धि बिहार और खासकर बेगूसराय जिले के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। मुकेश सिंह का जीवन यह संदेश देता है कि कठिन परिश्रम और समर्पण से कोई भी मुश्किल पार की जा सकती है। मुकेश सिंह के नेतृत्व में लद्दाख में पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा को और मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है। उनके साहस और अनुभव से लद्दाख में कानून व्यवस्था और बेहतर होगी।
