
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम के दौरान हिजाब विवाद को लेकर सुर्खियों में आईं डॉ. नुसरत परवीन ने अब तक अपनी सरकारी सेवा जॉइन नहीं की है। इसी बीच बिहार सरकार ने उनकी ज्वॉइनिंग की समय-सीमा एक बार फिर बढ़ा दी है। अब वे 7 जनवरी तक नौकरी ज्वाइन कर सकती हैं। खास बात यह है कि बीते 11 दिनों में दूसरी बार ज्वॉइनिंग की तारीख आगे बढ़ाई गई है।
डॉ. नुसरत परवीन के लिए नौकरी ज्वाइन करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर निर्धारित थी, लेकिन वह तय समय तक उपस्थित नहीं हुईं। इससे पहले उन्हें 20 दिसंबर तक ज्वॉइन करना था, मगर उस दिन भी उन्होंने रिपोर्ट नहीं की। इसके बाद राज्य स्वास्थ्य समिति ने समय-सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी थी। गौरतलब है कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी चयनित आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। उसी दिन डॉ. नुसरत परवीन को भी ज्वॉइनिंग लेटर दिया गया था। हालांकि, हिजाब विवाद के चलते उन्होंने अब तक नौकरी ज्वाइन नहीं की। 20 दिसंबर को पूरे दिन सिविल सर्जन कार्यालय में उनके आने का इंतजार होता रहा, लेकिन वह नहीं पहुंचीं।
दरअसल, डॉ. नुसरत परवीन की नियुक्ति पटना सिटी स्थित पीएचसी सदर के लिए हुई है। आयुष विभाग द्वारा जारी नियुक्ति पत्र के आधार पर उम्मीदवार को पहले सिविल सर्जन कार्यालय में रिपोर्ट करना होता है, जहां दस्तावेजों का सत्यापन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। इसके बाद सिविल सर्जन संबंधित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) में ज्वॉइनिंग के लिए आदेश जारी करते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले के दौरान एक और दिलचस्प मोड़ तब आया, जब झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. नुसरत परवीन को झारखंड में सरकारी सेवा में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दिया। अब देखना होगा कि बढ़ी हुई समय-सीमा के भीतर डॉ. नुसरत परवीन बिहार में ज्वॉइन करती हैं या किसी और विकल्प को चुनती हैं।