
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा का ‘जनसंवाद’ कार्यक्रम एक बार फिर लापरवाह अधिकारियों के लिए काल साबित हुआ। पूर्णिया में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान जब बायसी प्रखंड की एक महादलित महिला ने अपनी पीड़ा सुनाई, तो मंत्री का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कोर्ट और कमिश्नर के आदेश के बावजूद कार्रवाई न करने पर मंत्री ने कड़े लहजे में पूछा, “क्या आप लोग खुद को अदालत से भी ऊपर समझते हैं? यह तमाशा बंद कीजिए!”
महादलित महिला की फरियाद और प्रशासन की चुप्पी
बायसी से आई एक पीड़ित महिला ने मंत्री को बताया कि उसके पिता की जमीन पर अवैध कब्जा और हेरफेर किया जा रहा है। उसने इसकी शिकायत अंचलाधिकारी (CO), एडीएम (ADM) और डीसीएलआर (DCLR) से लेकर प्रमंडलीय आयुक्त तक से की। कमिश्नर का स्पष्ट आदेश होने के बावजूद स्थानीय अधिकारी मामले को लटकाए हुए थे। पीड़िता ने रोते हुए कहा, “मैं महादलित परिवार से हूं, शायद इसीलिए मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
“क्या गुप्तचर रखे हो?” – सीनियर अफसर का तंज
सुनवाई के दौरान जब एक अन्य मामला सामने आया जिसमें कोर्ट का ‘टाइटल सूट’ आदेश और एडीएम का निर्देश पहले से मौजूद था, तब भी सीओ (CO) जांच का बहाना बना रहे थे। इस पर मौके पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी (सचिव स्तर) ने सीओ को आड़े हाथों लेते हुए व्यंग्य किया— “जब कोर्ट का फैसला आ चुका है, तो आप अब क्या जांचना चाहते हैं? क्या इसके लिए कोई अलग से गुप्तचर (Detective) पाल रखे हैं?”
ट्रेनिंग की कमी या जानबूझकर देरी?
मंत्री विजय सिन्हा ने अधिकारियों के इस रवैये को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने मौके पर ही स्पष्ट किया कि बंदोबस्त की जमीन का अवैध हस्तांतरण या बिक्री अपने आप में शून्य (रद्द) मानी जाएगी। मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गरीबों और महादलितों को दफ्तरों के चक्कर कटवाना अपराध के समान है। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि ऐसे अंचलाधिकारियों को कानून और अदालती आदेशों की समझ के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाए।
लापरवाही पर अब ‘नो टॉलरेंस’
विजय सिन्हा ने सख्त चेतावनी दी कि जो अधिकारी अदालती आदेशों की अवहेलना करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार अब जमीनी विवादों में अधिकारियों की ‘मनमानी और टालमटोल’ की नीति को बर्दाश्त नहीं करने वाली है।