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भागे हुए अपराधियों की खैर नहीं, ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना बिहार

बिहार,‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। नए गृह मंत्री और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के सख्त रुख के बीच राज्य में ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही बिहार देश का पहला राज्य बन गया है, जहां फरार घोषित अपराधियों के खिलाफ भी अदालतों में मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से अपराधियों में कानून का डर बढ़ेगा और आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी लगाम लगेगी।

नए आपराधिक कानून के तहत किए गए ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ प्रावधान को बिहार ने देश में सबसे पहले लागू कर एक अहम मिसाल कायम की है। इस व्यवस्था के लागू होने से लंबे समय से फरार चल रहे गंभीर मामलों के अभियुक्तों के खिलाफ सजा की प्रक्रिया अब तेज और प्रभावी हो सकेगी। गृह विभाग के अनुसार, कई आरोपी जानबूझकर अदालत की कार्यवाही से बचते रहे हैं, जिससे मुकदमे वर्षों तक लटके रहते थे और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता था। दर्सल, इसी चुनौती से निपटने के लिए राज्य में ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ को अमल में लाया गया है। इसके तहत अभियुक्त की शारीरिक मौजूदगी के बिना भी जांच और ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। यह प्रावधान पहले सीआरपीसी में नहीं था, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 355 के तहत शामिल किया गया है। नियम के अनुसार, यदि अदालत को यह लगे कि अभियुक्त जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है या उसकी उपस्थिति अनिवार्य नहीं है, तो उसके बिना ही मुकदमे की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

हालांकि, इस प्रावधान को लागू करने के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं। ट्रायल शुरू करने से पहले अभियुक्त के खिलाफ कम से कम दो बार गिरफ्तारी वारंट जारी होना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद यदि आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ राष्ट्रीय या स्थानीय अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। साथ ही अभियुक्त के परिजनों को इसकी सूचना दी जाएगी और उसके निवास स्थान पर नोटिस चस्पा किया जाएगा। इन सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही न्यायालय आगे की कार्रवाई कर सकेगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि कोई फरार अभियुक्त बाद में न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है, तो उसे दोबारा सुनवाई का अवसर दिया जा सकता है। इसके अलावा, फैसले के बाद अपील का अधिकार भी रहेगा, लेकिन इसके लिए अभियुक्त की अदालत में मौजूदगी अनिवार्य होगी। बिहार के अपर मुख्य सचिव (गृह) अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि लंबित आपराधिक मामलों में तेजी लाने और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में बिहार ने देश में सबसे पहले ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ प्रावधान लागू कर एक सख्त और ऐतिहासिक पहल की है, जिससे जानबूझकर फरार चल रहे अभियुक्तों पर भी कानून का शिकंजा कस सकेगा।

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