
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक गलियारों से दूर नजर आ रहे जन सुराज के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर दिखाई देंगे। प्रशांत किशोर आगामी 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के प्रतिष्ठित सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में छात्रों और बुद्धिजीवियों के साथ एक विशेष संवाद करेंगे।
क्या है कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य?
इस विशेष सत्र का विषय “लोकतांत्रिक राजनीतिक नेतृत्व: गैर-विरासत के उम्मीदवारों के लिए अवसर और चुनौतियाँ” (Democratising Political Leadership) रखा गया है। यह कार्यक्रम दोपहर 2:00 बजे से शुरू होगा। इस सत्र का मुख्य केंद्र वे युवा हैं, जो किसी भी राजनीतिक घराने या पारिवारिक विरासत के बिना भारतीय राजनीति की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं और देश के भविष्य को आकार देना चाहते हैं।
गैर-विरासत वाले उम्मीदवारों की चुनौतियों पर चर्चा
अक्सर देखा जाता है कि भारतीय राजनीति के शीर्ष पदों पर स्थापित राजनीतिक परिवारों का वर्चस्व रहता है। ऐसे में प्रशांत किशोर इस ज्वलंत मुद्दे पर प्रकाश डालेंगे कि कैसे नए और प्रतिभाशाली व्यक्ति, जिनके पास कोई ‘पॉलिटिकल गॉडफादर’ नहीं है, इस कठिन रास्ते पर सफल हो सकते हैं। वह गैर-विरासत वाले उम्मीदवारों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, चुनावी फंडिंग और जमीनी स्तर पर संगठन बनाने की बारीकियों पर अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे।
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छात्रों के साथ सीधा संवाद
यह कार्यक्रम केवल एकतरफा भाषण तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक इंटरैक्टिव सत्र होगा, जहाँ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को सीधे प्रशांत किशोर से प्रश्न पूछने का अवसर मिलेगा। पीके, जिन्हें भारतीय चुनाव की नब्ज पहचानने का माहिर माना जाता है, युवाओं के शंकाओं का समाधान करेंगे और उन्हें राजनीति में एक करियर के रूप में देखने के लिए प्रेरित करेंगे।
पंजीकरण और प्रवेश की प्रक्रिया
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और संकायों के लिए यह एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर है। हॉल की क्षमता सीमित होने के कारण, कार्यक्रम में प्रवेश केवल निमंत्रण पत्र के माध्यम से ही दिया जाएगा। जो छात्र या शिक्षक इस चर्चा का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे कार्यक्रम के आधिकारिक QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या जारी किए गए URL पर जाकर अपना निःशुल्क निमंत्रण पत्र सुरक्षित कर सकते हैं।
यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब देश की राजनीति में नई सोच और नए चेहरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे अकादमिक परिवेश में प्रशांत किशोर का यह संबोधन निश्चित रूप से आने वाले समय की राजनीतिक दिशा और दशा पर गहरा प्रभाव डालेगा।
