
बिहार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने साफ किया है कि पंचायत चुनाव अपने तय समय पर ही कराए जाएंगे और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होगी। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है, ऐसे में आयोग इससे पहले ही पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न करा लेगा। साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बार भी पिछली बार की तरह मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्य समेत सभी पदों के लिए मतदान ‘मल्टी पोस्ट ईवीएम’ के जरिए कराया जाएगा, जिस पर राज्य सरकार नीतिगत सहमति दे चुकी है।
आयोग ने पदों की संख्या, परिसीमन और आरक्षण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। चूंकि 2021 की जनगणना के आंकड़े अब तक प्रकाशित नहीं हुए हैं, इसलिए आगामी पंचायत चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर ही कराए जाएंगे। फिलहाल पंचायतों के नए परिसीमन का कोई प्रस्ताव नहीं है, ऐसे में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं और पदों की कुल संख्या पूर्ववत रहने की संभावना है। आयोग ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही बिहार पंचायत राज अधिनियम के तहत हर दो क्रमिक चुनावों के बाद आरक्षण में बदलाव का प्रावधान है। वर्ष 2016 और 2021 के चुनाव एक ही आरक्षण सूची पर हुए थे, इसलिए नियमानुसार 2026 के चुनाव से पहले नए सिरे से आरक्षण तय किया जाएगा। यह आरक्षण भी 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्धारित होगा, जिससे कई क्षेत्रों में आरक्षित सीटों की स्थिति बदल सकती है और नए दावेदारों को अवसर मिल सकता है।
पंचायत चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग इस बार कई अत्याधुनिक तकनीकी उपाय अपनाने जा रहा है। आयोग के अनुसार, मतदान केंद्रों और मतगणना स्थलों पर शत-प्रतिशत वेबकास्टिंग की जाएगी, जिससे हर चरण पर लाइव निगरानी संभव होगी। वहीं ईवीएम की सुरक्षा के लिए स्ट्रॉन्ग रूम में हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम लगाए जाएंगे। मतगणना के दौरान मानवीय भूल की संभावना को कम करने के लिए ईवीएम से प्राप्त आंकड़ों को ओसीआर तकनीक के माध्यम से सीधे सिस्टम में दर्ज किया जाएगा, जिससे नतीजे अधिक सटीक होने के साथ-साथ तेजी से घोषित किए जा सकेंगे।
