बिहार के हाई-प्रोफाइल राजनीतिक परिवार से जुड़ी तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय की तलाक की कानूनी लड़ाई एक बार फिर चर्चा में है। पटना फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज सुनील दत्त पांडेय की अदालत में आज (मंगलवार) तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के बीच तीसरी बार मध्यस्थता (Mediation) के जरिए मामले को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे आपसी सहमति से विवाद को खत्म करने में सहयोग करें। पटना हाईकोर्ट ने पहले ही फैमिली कोर्ट को 6 महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था, जिसकी समय सीमा अब समाप्त हो चुकी है। फिलहाल सबकी निगाहें पटना फैमिली कोर्ट पर टिकी हैं। क्या आज की मध्यस्थता इस कड़वाहट को खत्म कर पाएगी या यह कानूनी जंग और लंबी खिंचेगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
मामले का अब तक का सफर;
विवाह: 12 मई 2018 को धूमधाम से शादी हुई।
दरार: 2019 में रिश्ते में कड़वाहट आई और तेज प्रताप ने तलाक की अर्जी दाखिल की।
कानूनी प्रक्रिया: मामला फैमिली कोर्ट से होते हुए हाईकोर्ट पहुँचा। हाईकोर्ट ने ऐश्वर्या की रिव्यू पिटीशन खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को जल्द सुनवाई का आदेश दिया था।
विफल प्रयास: इससे पहले दो बार सुलह की कोशिशें हो चुकी हैं—एक बार पटना जू (Zoo) में और दूसरी बार एक बड़े होटल में लालू यादव की मौजूदगी में। दोनों ही बैठकें बेनतीजा रहीं।
विवाद के मुख्य बिंदु;
पक्ष स्टैंड / मांग
तेज प्रताप यादव वे किसी भी कीमत पर तलाक चाहते हैं और साथ रहने को तैयार नहीं हैं।
ऐश्वर्या राय वे तलाक के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने राबड़ी देवी पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए हैं।
भत्ता एवं आवास ऐश्वर्या ने ₹1.5 लाख मासिक भत्ते और एसके पुरी में आवास की मांग की है, जबकि उन्होंने तेज प्रताप द्वारा दिए गए फ्लैट में रहने से इनकार कर दिया था।
क्या कहता है कानून?
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि इस बार भी मध्यस्थता विफल रहती है, तो कोर्ट साक्ष्यों (Evidence) के आधार पर फैसला लेगा। हिंदू मैरिज एक्ट में यदि लगाए गए आरोप (जैसे घरेलू हिंसा या अन्य) साबित नहीं होते, तो कोर्ट तलाक की याचिका खारिज भी कर सकता है। धारा 24 के तहत तलाक के मामलों का निपटारा शीघ्र होना अनिवार्य है।

