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सीएम नीतीश ने वैभव को दिया 50 लाख का चेक, 1 अणे मार्ग में गूंजी तालियां, नीतीश कुमार ने बताया टीम इंडिया का भविष्य

बिहार,वैभव

बिहार की माटी के लाल और भारतीय क्रिकेट के नए चमकते सितारे वैभव सूर्यवंशी के लिए आज का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया। अंडर-19 विश्व कप 2026 में अपने बल्ले से कोहराम मचाकर भारत को छठी बार विश्व विजेता बनाने वाले 14 वर्षीय वैभव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज राजकीय सम्मान से नवाजा। पटना के ‘1 अणे मार्ग’ स्थित संकल्प सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री ने वैभव को 50 लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

संकल्प सभागार में ऐतिहासिक पल
मुख्यमंत्री आवास आज एक ऐतिहासिक गौरव का गवाह बना। जैसे ही वैभव अपने माता-पिता के साथ सभागार में पहुंचे, वहां मौजूद मंत्रियों और आला अधिकारियों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस युवा चैंपियन का स्वागत किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैभव की पीठ थपथपाते हुए कहा, “आपने न केवल भारत को गौरवान्वित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का मान भी बढ़ाया है।”

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175 रनों की पारी और 30 छक्कों का कीर्तिमान
सम्मान समारोह के दौरान वैभव के उस अद्भुत प्रदर्शन की चर्चा बार-बार हुई, जिसने दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था।

विस्फोटक पारी: इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में वैभव की 175 रनों की तूफानी पारी ने भारत की जीत सुनिश्चित की थी।

छक्कों का किंग: पूरे टूर्नामेंट में 30 छक्के जड़कर वैभव ने एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैभव की बल्लेबाजी में जो परिपक्वता दिखी, वह उनकी कड़ी मेहनत और अटूट लगन का परिणाम है। उन्होंने वैभव को भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

खेल प्रतिभाओं के लिए सरकार का वादा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिहार के खिलाड़ियों के लिए बड़ी घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब प्रतिभाओं को तराशने के लिए विश्वस्तरीय खेल ढांचे का निर्माण कर रही है, ताकि भविष्य में बिहार से और भी ‘वैभव’ निकल सकें। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी वैभव की तकनीक की सराहना की। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने इसे बिहार के खेल इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” करार दिया।

समारोह के अंत में वैभव के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। बिहार के इस बेटे ने साबित कर दिया कि यदि प्रतिभा को सही अवसर मिले, तो उम्र महज एक संख्या रह जाती है।

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