
बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक बड़े सियासी तूफान में तब्दील हो चुका है। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और राजद (RJD) की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर सीधा और सनसनीखेज आरोप लगाया है। राबड़ी देवी ने दावा किया है कि इस केस में किसी रसूखदार ‘मंत्री या मंत्री-पुत्र’ की संलिप्तता है, जिसे बचाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी सबूतों को मिटाने और मामले को दबाने में जुटी है।
‘सीबीआई जांच केवल दिखावा’
सदन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा मामले को सीबीआई (CBI) को सौंपे जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह जांच नहीं, बल्कि लीपापोती का तरीका है। पहले सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई और अब केस सीबीआई को दे दिया गया। लेकिन सीबीआई किसकी है? वह भी उन्हीं की है। जब रसूखदार लोग शामिल हैं, तो निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” राबड़ी देवी के साथ मौजूद महिला विधायकों ने भी इस दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए और न्याय की मांग की।
भाई वीरेंद्र का ‘पुलिस कॉल’ वाला सनसनीखेज दावा
इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि नीट मामले पर आवाज उठाने के कारण उन्हें पुलिस अधिकारियों के फोन आ रहे हैं। विधायक ने कहा, “पुलिस अफसर फोन करके मुझे अप्रत्यक्ष रूप से चुप रहने और इस मुद्दे पर बयान न देने की सलाह दे रहे हैं। यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन किसी बड़े चेहरे को बचाने के लिए दबाव में काम कर रहा है।”
क्या है पूरा मामला?
जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा पटना के एक हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी, जिसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता और बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए सरकार ने पहले SIT का गठन किया और अब जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा है। विपक्ष के इन तीखे हमलों ने सरकार को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। जहाँ सरकार इसे निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया बता रही है, वहीं राबड़ी देवी के ‘मंत्री पुत्र’ वाले बयान ने सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि आखिर वह रसूखदार चेहरा कौन है जिसे बचाने के आरोप लग रहे हैं।

