
बिहार विधान परिषद में शुक्रवार को महिला शिक्षकों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने विशेष रूप से महिला शिक्षकों के स्थानांतरण पर जोर दिया। उन्होंने मांग की कि सभी महिला शिक्षकों को उनके गृह जिले में ही पोस्टिंग दी जाए, क्योंकि दूरस्थ जिलों में तबादला होने से उन्हें परिवार और व्यक्तिगत जीवन में भारी असुविधा होती है। राबड़ी देवी ने शिक्षा मंत्री सुनील कुमार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।
इस पर शिक्षा मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार महिला शिक्षकों के हित में सकारात्मक फैसला लेगी और उनके गृह जिले में स्थानांतरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। सदन में एक अन्य प्रमुख मुद्दा महिला कर्मचारियों को 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश (Child Care Leave) देने का रहा। सदस्यों ने बताया कि राज्यपाल सचिवालय की सिफारिश के बावजूद शिक्षा विभाग में इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। माले के एमएलसी संजय कुमार सिंह ने सभी महिला शिक्षकों को यह अवकाश उपलब्ध कराने की मांग दोहराई। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जवाब में कहा कि सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि अगले 15 दिनों के अंदर इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा और महिला शिक्षकों को शिशु देखभाल अवकाश का लाभ जल्द मिलेगा।
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इसके अलावा, राजद के डॉ. सुनील कुमार सिंह ने मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान की समस्या उठाई। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब नियमों में संशोधन कर दिया गया है। पहले मातृत्व अवकाश खत्म होने के बाद वेतन दिया जाता था, लेकिन अब हर महीने नियमित वेतन मिलेगा। साथ ही, मातृत्व अवकाश के साथ चिकित्सा अवकाश सहित अन्य सभी देय राशियां भी समय पर भुगतान की जाएंगी। ये फैसले और आश्वासन महिला शिक्षकों के लिए राहत भरे साबित हो सकते हैं, जिन्हें लंबे समय से ऐसी मांगों का इंतजार था।

