
तमिलनाडु के मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम द्वारा उत्तर भारतीय प्रवासियों, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश के श्रमिकों पर की गई अपमानजनक टिप्पणी ने देश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। पन्नीरसेल्वम ने प्रवासियों को ‘टेबल साफ करने’ और ‘पानीपुरी बेचने’ वाला बताकर उनके आत्मसम्मान पर चोट की है, जिसके बाद बिहार के तमाम दलों के नेताओं ने एकजुट होकर डीएमके (DMK) और ‘इंडिया’ गठबंधन को कटघरे में खड़ा किया है।
क्या था विवादित बयान?
चेंगलपट्टू में एक कार्यक्रम के दौरान पन्नीरसेल्वम ने कहा कि उत्तर भारत के लोग तमिलनाडु में निम्न स्तर के काम करने आ रहे हैं क्योंकि उन्हें केवल हिंदी आती है और उनके राज्यों में नौकरियां नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु के युवा अंग्रेजी शिक्षा के कारण विदेशों में मोटा वेतन पा रहे हैं, जबकि हिंदी भाषी श्रमिक यहाँ मजदूरी करने को मजबूर हैं।
बिहार के मंत्रियों का प्रहार : ‘मानसिक दिवालियापन और पागलखाना’
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह बयान उनके मानसिक दिवालियापन का परिचय है। ऐसे लोगों को तो पागलखाने भेज देना चाहिए। हमें बिहारी होने पर गर्व है और बिहार भारत का गौरव है।”
वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसे ‘फूट डालो और राज करो’ की घटिया राजनीति करार दिया। चिराग ने कहा कि कुछ नेता सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए भाषा और क्षेत्र के नाम पर देश को बांटने की कोशिश करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार ‘सबका साथ-साथ सबका विकास’ में विश्वास रखती है, जबकि विपक्षी दल ऐतिहासिक रूप से यूपी-बिहार के लोगों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझते आए हैं।
‘बिहारी रुक गए तो ठप हो जाएगी दक्षिण की अर्थव्यवस्था’
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने प्रवासियों के योगदान को रेखांकित करते हुए चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “आज अगर उत्तर भारत के लोग एक दिन के लिए भी काम करना बंद कर दें, तो तमिलनाडु जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी। संविधान हर नागरिक को कहीं भी जाकर काम करने का हक देता है।” उन्होंने कांग्रेस से मांग की कि वह अपने सहयोगी दल के इस बयान पर अपना स्टैंड साफ करे।
विपक्ष की सफाई और गठबंधन की मजबूरी
इस विवाद पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि मंत्री की मंशा अपमान करने की नहीं रही होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में पलायन एक बड़ी समस्या है और इसे रोकने के लिए ठोस योजनाओं की जरूरत है। दूसरी ओर, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने इसे राष्ट्र का अपमान बताते हुए ‘विविधता में एकता’ की याद दिलाई।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि डीएमके की ऐसी ओछी टिप्पणियां ही तमिलनाडु में उनके पतन का कारण बनेंगी। कुल मिलाकर, इस बयान ने उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीतिक खाई को और गहरा कर दिया है।
