
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को सदन का माहौल उस समय दिलचस्प हो गया जब डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने अपने खास अंदाज में विपक्ष की बोलती बंद कर दी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए विजय सिन्हा ने आरजेडी विधायक बोगो सिंह के टोकने पर ऐसा तंज कसा कि पूरा सदन ठहाकों और चर्चाओं से गूंज उठा। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट लहजे में कहा कि सरकार समस्याओं के सतही समाधान के बजाय ‘आयुर्वेदिक इलाज’ यानी स्थायी समाधान पर विश्वास रखती है।
जेडीयू विधायक के सवाल से शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत जहानाबाद से जेडीयू विधायक राहुल कुमार के एक सवाल से हुई। राहुल कुमार ने विभाग द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि मंत्री जी (विजय सिन्हा) तो बदलाव चाहते हैं, लेकिन कभी-कभी लगता है कि उनके ही विभाग के लोग उनके पैर खींच रहे हैं। उन्होंने कार्यों को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा की मांग की।
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“अंगद का पैर कोई नहीं खींच सकता”
जेडीयू विधायक की शंका पर पलटवार करते हुए विजय सिन्हा ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा, “अंगद का पैर कोई खींच नहीं सकता। हमारा जो मिशन और ध्येय है, हम परिणाम की चिंता किए बिना उस पर काम करते हैं।” उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि मार्च के बाद अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू होगा और इसके परिणाम धरातल पर दिखेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कुछ बाधाएं जरूर आती हैं।
आरजेडी विधायक को दिया करारा जवाब
इसी दौरान जब मटिहानी से आरजेडी विधायक राजकुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह ने उन्हें बीच में टोका, तो विजय सिन्हा ने उन्हें बीमारी और इलाज का उदाहरण देते हुए चुप करा दिया। उन्होंने कहा: “दवा कड़वी होती है, लेकिन जब उसका असर होता है और इंसान स्वस्थ हो जाता है, तो सब उसे स्वीकार करते हैं। बीमारी के इलाज के लिए धैर्य रखना पड़ता है, हड़बड़ाने से काम नहीं चलता। हम एलोपैथी या होम्योपैथी के चक्कर में नहीं पड़ते, बल्कि आयुर्वेदिक इलाज करते हैं जो बीमारी का स्थायी समाधान कर देता है।”
विजय सिन्हा के इस बयान का सीधा इशारा भूमि विवादों और विभागीय भ्रष्टाचार की उन पुरानी ‘बीमारियों’ की ओर था, जिन्हें वे जड़ से खत्म करने का दावा कर रहे हैं। उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि सरकार अब कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।
