
बिहार सरकार ने राज्य में भूमि विवादों के निपटारे और खोए हुए भू-अभिलेखों को खोजने की दिशा में एक साहसिक पहल की है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री और राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि जो भी व्यक्ति राज्य में सरकार के उन भू-अभिलेखों (Land Records) को खोजने में मदद करेगा, जिनके कागजात वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें सरकार ‘भू-योद्धा’ के रूप में सम्मानित करेगी।
क्यों पड़ी इस पहल की जरूरत?
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजद विधायक गौतम कृष्ण ने भू-अभिलेखों के गायब होने और उससे जुड़ी समस्याओं का मामला उठाया था। इस पर संज्ञान लेते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन उन सभी सरकारी दस्तावेजों को ट्रैक करने का प्रयास कर रहा है जो समय के साथ खो गए हैं या जिनका रिकॉर्ड अपडेट नहीं है। यह कदम राज्य में जमीन संबंधी मुकदमों को कम करने और गरीब रैयतों को उनकी जमीन का अधिकार दिलाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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सीमावर्ती इलाकों में अवैध कब्जे पर सरकार सख्त
किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड में कथित अवैध कब्जे के मामले पर भी उपमुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया। विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि पिछले 10 वर्षों में बाहर से आए लोगों ने दलितों और आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। इस पर उप-मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अब तक की जांच में ऐसी किसी संगठित बाहरी घुसपैठ की पुष्टि नहीं की है। हालांकि, उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि बंदोबस्ती वाली जमीन की अवैध खरीद-बिक्री या हस्तांतरण का कोई भी मामला सामने आता है, तो तुरंत उस जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी जाएगी और उसे पुनः सरकार अपने कब्जे में ले लेगी।
नगर विकास विभाग में पारदर्शिता पर जोर
भूमि सुधार के अलावा, उपमुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग में कामकाज के तरीकों में बदलाव का भी संकेत दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि भविष्य में विभाग के सभी विकास कार्य केवल ‘टेंडर’ के माध्यम से ही किए जाएंगे, विभागीय कार्यों (Departmental works) पर रोक लगा दी गई है। विपक्ष की ओर से लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी छोटी योजनाओं में गड़बड़ी पाई गई, तो सरकार उसकी उच्चस्तरीय जांच करवाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
