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बिहार में जमीन रजिस्ट्री का खेल खत्म! 1 अप्रैल 2026 से इन 13 जानकारियों के बिना नहीं बिकेगी जमीन

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बिहार सरकार ने राज्य में जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाले विवादों और धोखाधड़ी को जड़ से खत्म करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत, अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदार को संपत्ति का पूरा ‘कच्चा-चिट्ठा’ पोर्टल पर दर्ज करना होगा।

13 जानकारियाँ जो अब अनिवार्य होंगी;

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बिहार सरकार ने राज्य में जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाले विवादों और धोखाधड़ी को जड़ से खत्म करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत, अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदार को संपत्ति का पूरा ‘कच्चा-चिट्ठा’ पोर्टल पर दर्ज करना होगा।

क्रम अनिवार्य जानकारी विवरण
1 निबंधन कार्यालय जहाँ रजिस्ट्री होनी है
2 अंचल (Block) जमीन का संबंधित ब्लॉक
3 मौजा गाँव या क्षेत्र का नाम
4 थाना नंबर राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार
5 खाता संख्या खतियान का खाता नंबर
6 खेसरा (Plot No.) जमीन का प्लॉट नंबर
7 रकबा जमीन का सटीक माप
8 चौहद्दी चारों तरफ की सीमाएं
9 जमाबंदी करंट होल्डिंग नंबर
10 जमाबंदी धारक जिसके नाम पर लगान कट रहा है
11 विक्रेता का नाम जमीन बेचने वाला
12 क्रेता का नाम जमीन खरीदने वाला
13 भूमि का प्रकार आवासीय, कृषि या व्यावसायिक
कैसे काम करेगी नई प्रणाली?
यह व्यवस्था केवल डेटा भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वचालित सत्यापन (Auto-Verification) पर आधारित है:-
1) पोर्टल लॉगिन: आवेदक को ई-निबंधन पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाकर लॉगिन करना होगा।
2) CO की जांच: यदि आवेदक ‘अद्यतन जानकारी’ का विकल्प चुनता है, तो डेटा सीधे संबंधित अंचल अधिकारी (CO) के पास जाएगा।
3) 10 दिन की समय सीमा: अंचल अधिकारी को 10 दिनों के भीतर विवरण की पुष्टि करनी होगी। यदि 10 दिनों में कोई आपत्ति नहीं आती, तो जानकारी को सही मानकर आवेदन स्वतः निबंधन कार्यालय को भेज दिया जाएगा।
4) SMS अलर्ट: पूरी प्रक्रिया के दौरान आवेदक को हर स्टेप की जानकारी SMS के जरिए दी जाएगी।

इस बदलाव के फायदे;
जमाबंदी और भूमि के प्रकार की पहले ही जांच हो जाने से भविष्य के कानूनी झंझट खत्म होंगे। दलालों और बिचौलियों की भूमिका कम होगी, क्योंकि सारा डेटा ऑनलाइन और ट्रैक करने योग्य होगा। खरीदार को पहले से पता होगा कि वह जो जमीन खरीद रहा है, उसका रिकॉर्ड सरकारी डेटाबेस में कैसा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा मद्य निषेध विभाग ने संयुक्त रूप से सभी जिलाधिकारियों (DM) को इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

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