बिहार सरकार ने राज्य की प्रगति और सामाजिक संरचना को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘जनगणना 2026’ की आधिकारिक घोषणा कर दी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि यह व्यापक सर्वे अभियान अप्रैल 2026 से शुरू होगा और कुल 45 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया को संपन्न कर लिया जाएगा। इस बार की जनगणना न केवल जनसंख्या के आंकड़े जुटाएगी, बल्कि लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का भी सटीक खाका पेश करेगी।
दो चरणों में पूरा होगा काम
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के अनुसार, जनगणना का कार्य दो महत्वपूर्ण चरणों (फेज) में विभाजित किया गया है:
प्रथम चरण (मकानों का सूचीकरण): यह चरण 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक चलेगा। इसमें मुख्य रूप से मकानों की नंबरिंग और घरों से जुड़ी बुनियादी जानकारी जुटाई जाएगी।
द्वितीय चरण (व्यक्तिगत विवरण और जाति): सबसे महत्वपूर्ण दूसरा चरण 2 मई से 31 मई 2026 तक संचालित होगा। इसमें प्रगणक घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य की विस्तृत जानकारी दर्ज करेंगे।
जातिगत डेटा और गोपनीयता पर जोर
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जाति आधारित जानकारी का संग्रह है। सरकार का उद्देश्य राज्य की सामाजिक संरचना की एक स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करना है। उपमुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे। किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी का सार्वजनिक रूप से खुलासा या दुरुपयोग नहीं किया जाएगा।
सर्वे में पूछे जाएंगे ये सवाल
जनगणना के दौरान परिवारों से उनकी आर्थिक स्थिति, घर में उपलब्ध सुविधाएं (जैसे बिजली, पानी, शौचालय), शिक्षा का स्तर और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को इस महासर्वे की कमान सौंपी गई है, जो आधुनिक तकनीक और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से डेटा संकलन करेगा।
भविष्य की योजनाओं का बनेगा आधार
सरकार का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की नींव रखी जाएगी। सटीक डेटा होने से सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन वर्गों और क्षेत्रों को आरक्षण, सब्सिडी या विशेष सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है। इससे संसाधनों का सही वितरण सुनिश्चित हो सकेगा।
