बिहार विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर विधानसभा में जोरदार बहस छिड़ गई। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें RJD और BJP के विधायकों ने एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला।
RJD विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार की इस योजना की आलोचना करते हुए कहा कि बिहार में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे सड़कों का निर्माण बड़े उद्योगपतियों अडानी और अंबानी से करवाया जा रहा है, जबकि महिलाओं को रोजगार के नाम पर सिर्फ 10-10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, जिनसे वे बकरी, सूअर या मुर्गी खरीद सकें। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “मैं बिहार में इसलिए नहीं पैदा हुआ कि सरकार मुझे बकरी-सूअर चराने के लिए 10-10 हजार दे। मुझे सड़कें बनाने लायक बनाया जा सकता था, लेकिन सरकार नहीं चाहती कि मैं आगे बढ़ूं।” इस पर BJP विधायक मिथिलेश तिवारी ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने RJD के पूर्व शासनकाल को याद दिलाते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव के समय चरवाहा स्कूल खोले गए थे, जो गरीब बच्चों के लिए था। आज नीतीश सरकार के कारण गरीबों के घरों में लालटेन की जगह LED बल्ब जल रहा है और सड़कें इतनी अच्छी बनी हैं कि तेजस्वी यादव उन पर घूम-घूमकर डांस कर रहे हैं। उन्होंने RJD पर जमीन कब्जे का आरोप लगाते हुए पूछा, “इनके राज में लालू जी जिस जमीन को देखते थे, उस पर कब्जा हो जाता था। नीतीश जी के किसी रिश्तेदार का नाम बताइए, जिसने जमीन पर कब्जा किया हो।”
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मिथिलेश तिवारी ने आगे कहा कि RJD के शासन में बकरियां तक उठाकर ले ली जाती थीं, जबकि वर्तमान सरकार महिलाओं को 10-10 हजार रुपये देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही है और आत्मनिर्भर बना रही है। गौरतलब है कि यह बहस मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को प्रथम चरण में 10 हजार रुपये की सहायता देने पर केंद्रित रही, जिसका उद्देश्य महिलाओं को पशुपालन या छोटे व्यवसाय से जोड़कर सशक्त बनाना है। सदन में दोनों पक्षों के बीच यह नोकझोंक काफी देर तक चलती रही।


