
IAS अधिकारी संजीव हंस से मुलाकात के लिए गायत्री देवी अपने मासूम बेटे के साथ उनके आवास पर पहुंचीं, जहां पूरे घटनाक्रम के दौरान हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। आवास के गेट पर काफी देर तक खड़े रहने के बावजूद उन्हें अंदर प्रवेश नहीं मिला।
गेट पर तैनात कर्मियों ने बताया कि साहब घर पर मौजूद नहीं हैं और फिलहाल उनसे मुलाकात संभव नहीं है। इसके बावजूद गायत्री देवी लगभग आधे घंटे से अधिक समय तक बेटे के साथ गेट पर इंतजार करती रहीं। जब बार-बार आग्रह के बाद भी मुलाकात नहीं हो सकी तो उन्होंने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को मौके पर बुला लिया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम आवास पर पहुंची और अपने स्तर से भी बात कराने की कोशिश की, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद गेट नहीं खोला गया। इसके बाद पुलिस के सुझाव पर गायत्री देवी शास्त्रीनगर थाने पहुंचीं, जहां उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। थाने में गायत्री देवी ने बताया कि उनका बेटा लगातार अपने पिता से मिलने की जिद कर रहा था। वह कह रहा था कि स्कूल में सभी बच्चों के पापा साथ रहते हैं, लेकिन उसके पापा क्यों नहीं हैं। इसी वजह से वह बेटे को उसके पिता से मिलाने के लिए लेकर आई थीं।
गायत्री देवी का कहना है कि बेटे के स्कूल में दाखिले के समय संजीव हंस ने खुद उन्हें अपना आधार कार्ड दिया था, जिससे पिता होने की बात स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पहचान स्वीकार कर लेना ही काफी नहीं होता, एक पिता के रूप में जिम्मेदारियां निभाना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संजीव हंस पहले इलाहाबाद में उनसे मिलने आए थे और दोनों पति-पत्नी की तरह दो दिन तक साथ रहे। बावजूद इसके अब मिलने से इनकार किया जा रहा है। गायत्री देवी के अनुसार, शास्त्रीनगर थाने में उन्हें बताया गया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और पहले वहां से स्थिति स्पष्ट होने दी जाए। इस आधार पर उनकी लिखित शिकायत भी स्वीकार नहीं की गई।