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पटना पुलिस का ‘एक्शन मोड’: प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले प्रभात मेमोरियल अस्पताल में धमक़ी SIT…

बिहार,पटना

बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पुलिस और मेडिकल सिस्टम की भूमिका पर सवाल गहराते जा रहे हैं। सोमवार को इस मामले में उस वक्त बड़ा मोड़ आया, जब अस्पताल प्रबंधन की निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले पटना पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) प्रभात मेमोरियल अस्पताल धमक पड़ी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पुलिस का ‘पहरा’
शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्रा की मौत के बाद चौतरफा घिरे डॉ. प्रभात मेमोरियल हीरामती अस्पताल के CMD डॉ. सतीश कुमार सिंह ने दोपहर 2 बजे मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने का ऐलान किया था। हालांकि, डॉ. सिंह अपनी चुप्पी तोड़ पाते, उससे पहले ही पुलिस की टीम अस्पताल पहुंच गई और छानबीन शुरू कर दी। पुलिस की इस सक्रियता को “डैमेज कंट्रोल” और साक्ष्यों को सुरक्षित करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

SIT की मैराथन छापेमारी और पूछताछ
मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित एसआईटी (SIT) ने सोमवार सुबह से ही अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

• डॉ. सहजानंद की क्लिनिक: टीम सबसे पहले डॉ. सहजानंद के क्लिनिक पहुंची और उनसे लंबी पूछताछ की।

• अस्पताल के रिकॉर्ड: इसके बाद टीम राजेंद्र नगर स्थित प्रभात मेमोरियल अस्पताल पहुंची, जहाँ छात्रा का तीन दिनों तक इलाज चला था। पुलिस ने वहां से इलाज से जुड़े ओरिजिनल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल चार्ट्स को अपने कब्जे में लिया है।

• मेडिकल लापरवाही का एंगल: जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या छात्रा को गलत दवा दी गई थी या इलाज के दौरान जानबूझकर देरी की गई।

हॉस्टल से अस्पताल और मौत का सफर
बता दें कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इसी अस्पताल में 6 जनवरी को भर्ती कराया गया था। तीन दिनों तक यहाँ इलाज चलने के बाद, जब स्थिति हाथ से निकल गई, तो उसे मेदांता रेफर कर दिया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने छात्रा के साथ हुई दरिंदगी की बात छिपाई और इलाज में घोर लापरवाही बरती।

सूत्रों के मुताबिक, पटना पुलिस आज शाम तक इस मामले में कोई बड़ा खुलासा कर सकती है। पुलिस अब छात्रा की गतिविधियों, हॉस्टल संचालक की भूमिका और अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट्स के बीच के विरोधाभास को सुलझाने में जुटी है।

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