
न्यायिक आदेशों की अवहेलना और कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ रोहतास जिले की अदालत ने एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अकोढ़ीगोला थानाध्यक्ष के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए उनके वेतन से प्रतिदिन 500 रुपये की कटौती करने का आदेश जारी किया है। अदालत का यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक पुलिस अधिकारी अदालत के निर्देशों का पूर्णतः पालन नहीं करते।
क्या है पूरा विवाद?
मामला वर्ष 2023 में मधुरामपुर गांव में हुई एक सनसनीखेज हत्या से जुड़ा है। इस हत्याकांड के दो आरोपियों के खिलाफ अदालत में ट्रायल (सुनवाई) चल रहा है। अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती से साबित करने के लिए हत्या में प्रयुक्त हथियार यानी ‘कैंची’ को मुख्य साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने अकोढ़ीगोला थानाध्यक्ष को बार-बार निर्देश दिया कि वे उस ‘कैंची’ को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करें ताकि मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ सके।
चेतावनी और नोटिस की अनदेखी पड़ी भारी
अदालत द्वारा बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद साक्ष्य पेश नहीं किया गया। हद तो तब हो गई जब 2 दिसंबर 2025 को जारी किए गए अंतिम ‘कारण बताओ नोटिस’ का भी थानाध्यक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस की इस कार्यशैली को अदालत ने न्याय प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डालना माना। न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस की इस सुस्ती की वजह से आरोपियों के ‘शीघ्र न्याय’ पाने के संवैधानिक अधिकार का हनन हो रहा है।
कोषागार अधिकारी को सख्त निर्देश
अदालत ने केवल सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि इसके अनुपालन के लिए सासाराम के कोषागार अधिकारी (Treasury Officer) को सीधे आदेश दिया है कि वे थानाध्यक्ष के मासिक वेतन से प्रतिदिन के हिसाब से कटौती सुनिश्चित करें। यदि इस आदेश के क्रियान्वयन में देरी हुई, तो संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी पर भी अवमानना की गाज गिर सकती है। इस सख्त आदेश की प्रति डीआईजी (DIG) और एसपी (SP) को भी भेज दी गई है ताकि पुलिस महकमे में अनुशासन कायम किया जा सके।
बिहार में यह अपनी तरह का एक बड़ा मामला है जहाँ किसी थानाध्यक्ष के वेतन पर इस तरह का ‘डेली जुर्माना’ लगाया गया है। यह फैसला उन सभी अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो अदालत के समन और आदेशों को हल्के में लेते हैं।

