
बिहार की राजनीति में खरमास खत्म होते ही हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को फिर से पूरी तरह सियासी एक्शन मोड में नजर आए। नए साल की अपनी पहली बड़ी बैठक में तेजस्वी ने आरजेडी के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के साथ मंथन किया।
रणनीति: 100 दिन का ‘मौन’
2025 विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पहली बार तेजस्वी ने सार्वजनिक रूप से अपनी रणनीति स्पष्ट की है। तेजस्वी ने साफ किया कि वह सरकार को काम करने का समय देंगे। उन्होंने कहा, “हम 100 दिनों तक सरकार के फैसलों पर कुछ नहीं बोलेंगे।” आरजेडी नेता ने एनडीए सरकार को उनके चुनावी वादों की याद दिलाते हुए घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिलाओं को 2-2 लाख रुपये और 1 करोड़ युवाओं को नौकरियां मिलेंगी? वहीं, फरवरी में होने वाले विधानमंडल सत्र को लेकर भी सांसदों के साथ विस्तृत चर्चा हुई, ताकि सदन के भीतर नीतीश सरकार को मजबूती से घेरा जा सके।
बैठक में ‘खास’ चेहरे;
तेजस्वी यादव ने इस बैठक का एक वीडियो अपने एक्स (X) हैंडल पर साझा किया, जिसका कैप्शन दिया— “पार्टी के माननीय सांसदों के साथ संवाद”। दिलचस्प बात यह है कि इस वीडियो में कोई आवाज नहीं है, जिसे राजनीतिक गलियारों में ‘मौन संदेश’ के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में मीसा भारती, संजय यादव और मनोज झा समेत पार्टी के दिग्गज नेता मौजूद रहे।
हालांकि,भले ही 2025 में एनडीए को प्रचंड जीत मिली हो, लेकिन तेजस्वी यादव ने यह साफ कर दिया है कि वह मैदान छोड़ने वाले नहीं हैं। सांसदों ने चुनाव हार के कारणों पर अपनी बात रखी और भविष्य की राजनीतिक लड़ाई के लिए रोडमैप तैयार किया। तेजस्वी का यह अंदाज बताता है कि 100 दिनों का यह विराम केवल ‘तूफान से पहले की शांति’ है। फरवरी का विधानमंडल सत्र बिहार की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकता है।
