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दाखिल-खारिज का नया नियम: 14 दिनों में करना होगा म्यूटेशन, फाइल दबाई तो जेल जाएंगे अधिकारी; विजय सिन्हा की चेतावनी

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बिहार में जमीन रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने वाले आम लोगों के लिए राहत भरी खबर है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि म्यूटेशन की फाइलों को बेवजह लटकाना अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि ‘व्यवस्था के विरुद्ध गंभीर अपराध’ माना जाएगा। दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब सीधे जेल भेजने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।

14 दिनों का डेडलाइन: बिना आपत्ति वाले मामलों में तुरंत आदेश
उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जिन म्यूटेशन मामलों में कोई आपत्ति (Objection) दर्ज नहीं है, उन्हें लटकाए रखना भ्रष्टाचार का संकेत है। नियमों के अनुसार, आम-खास सूचना जारी होने के 14 दिनों के भीतर यदि कोई वैध आपत्ति नहीं आती है, तो अंचल अधिकारी (CO) को तुरंत आदेश पारित करना होगा। समय पर दाखिल-खारिज न होने से किसान और रैयत सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और बैंक ऋण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, जिसकी पूरी जवाबदेही अब संबंधित अधिकारी की होगी।

‘स्वतः आपत्ति’ दर्ज करने वाली चालाकी पर प्रहार
विभाग ने अंचल अधिकारियों की उस कार्यशैली पर भी नकेल कसी है, जिसमें वे बिना किसी ठोस आधार के खुद ही ‘स्वतः आपत्ति’ (Sua Sponte Objection) दर्ज कर देते हैं ताकि फाइल को महीनों तक सुनवाई के नाम पर लंबित रखा जा सके। नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी या प्रतिबंधित जमीन के मामलों को छोड़कर, निजी भूमि पर अकारण आपत्ति दर्ज करना ‘कदाचार’ की श्रेणी में आएगा। राजस्व सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को पत्र लिखकर ऐसे लापरवाह CO की सूची तैयार करने और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

जीरो टॉलरेंस: भ्रष्टाचार पर अंतिम चोट
भूमि सुधार जन कल्याण संवाद में सामने आई शिकायतों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। विजय सिन्हा ने दोटूक कहा कि टाल-मटोल वाली नीति अब बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई असामाजिक तत्व म्यूटेशन प्रक्रिया में अकारण बाधा डालता है, तो उसके विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। विभाग का लक्ष्य बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करना है ताकि जमीन विवादों में कमी आए और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

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