
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में बड़े बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। उपमुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भ्रष्टाचार और सुस्ती पर लगाम लगाने के लिए एक अनोखा ‘मेडिकल फॉर्मूला’ अपनाया है, जिससे प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है।
विभाग की समीक्षा बैठक में विजय सिन्हा ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, “हम अभी हौले-हौले डोज दे रहे हैं, ज्यादा दे देंगे तो रिएक्शन हो जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सुधार की प्रक्रिया ‘होम्योपैथी’ की तरह धीरे-धीरे चल रही है, लेकिन अगर हालात नहीं सुधरे तो ‘एलोपैथी’ और ‘सर्जरी’ जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। वहीं, मंत्री का कहना है कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं, इसलिए अचानक सख्ती से पूरा सिस्टम ठप पड़ सकता है। इसी वजह से चरणबद्ध तरीके से सुधार लागू किए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इसे किसी भी सूरत में नरमी न समझा जाए।
हालांकि, इन प्रयासों का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है। विभाग की निष्पादन दर 75.30 प्रतिशत से बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई है। वहीं लंबित मामलों में भी बड़ी कमी आई है और अब तक 30 हजार से अधिक फाइलों का निपटारा किया जा चुका है। विजय सिन्हा ने 31 मार्च तक विभागीय सुधार की डेडलाइन तय की है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि जमीन की रजिस्ट्री हो या दाखिल-खारिज, अब किसी तरह की बहानेबाजी नहीं चलेगी। खुद उपमुख्यमंत्री हर अंचल की रिपोर्ट की निगरानी कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि राजस्व विभाग की इस नई ‘मेडिकल पॉलिसी’ से आम जनता को कितनी राहत मिलेगी और क्या जमीन से जुड़े काम बिना घूस के हो पाएंगे। इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।