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बिहार में साइबर अपराध का बड़ा विस्फोट: युवक के खाते से एक महीने में उड़ाए ₹1.95 करोड़, ‘माइनस बैलेंस’ देख उड़े बैंक के होश

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बिहार में साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे आम आदमी के बैंक खातों को अपना ‘लॉन्ड्री अड्डा’ बना रहे हैं। खगड़िया जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक साधारण युवक के बैंक खाते से महज एक महीने के भीतर करीब 1 करोड़ 95 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन के बावजूद खाताधारक को इसकी कानों-कान खबर तक नहीं लगी।

खाता, बन गया ठगी का जरिया
पीड़ित युवक राजेश कुमार चौधरी (निवासी नयागांव शिरोमणी टोला) ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में खगड़िया के एक्सिस बैंक में इस उम्मीद के साथ बचत और चालू खाता खुलवाया था कि बैंक से लोन लेकर वे अपना कोई छोटा-मोटा रोजगार शुरू करेंगे। खाता खुलवाते समय उन्होंने मात्र 26 हजार रुपये जमा किए थे। लोन पास नहीं होने के कारण उन्होंने खाते में कोई बड़ा लेन-देन नहीं किया और उनका एटीएम कार्ड व चेकबुक भी उनके पास ही सुरक्षित था।

ई-मेल पर आए नोटिस ने खोली पोल
राजेश के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब सोमवार को उनके ई-मेल पर साइबर क्राइम विभाग का एक नोटिस आया। आनन-फानन में जब वे बैंक पहुंचे और स्टेटमेंट निकलवाया, तो पता चला कि उनके खाते से बीते एक महीने में लगभग ₹1.95 करोड़ का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हो चुका है। वर्तमान में उनके खाते का बैलेंस -7.49 लाख (माइनस सात लाख उनचास हजार) रुपये दिखा रहा है, जिसका मतलब है कि खाता ओवरड्रॉन हो चुका है और साइबर अपराधियों ने इसका दुरुपयोग किया है।

बैंकिंग सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
पीड़ित का दावा है कि उन्होंने न तो किसी को ओटीपी (OTP) दिया और न ही अपनी बैंकिंग जानकारी साझा की। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना किसी अलर्ट या मैसेज के करोड़ों का लेन-देन कैसे संभव हुआ?

बैंक की कार्रवाई: एक्सिस बैंक के सहायक प्रबंधक ने बताया कि शिकायत मिलते ही खाता फ्रीज कर दिया गया है।

पुलिस का रुख: साइबर डीएसपी निशांत गौरव ने कहा है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस खेल के पीछे कौन सा सिंडिकेट सक्रिय है।

यह घटना डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा में बड़ी सेंध की ओर इशारा करती है। फिलहाल राजेश कुमार न्याय की गुहार लगा रहे हैं, क्योंकि वे उस राशि के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे हैं जो उन्होंने कभी देखी ही नहीं।

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