
बिहार पुलिस की साख पर एक बार फिर गहरा बट्टा लगा है। वैशाली जिले के लालगंज थाना से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने रक्षक को ही भक्षक के कटघरे में खड़ा कर दिया है। चोरी के मामले में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सोना, चांदी और नकदी बरामद करने के बावजूद उसे सरकारी रिकॉर्ड (जब्ती सूची) से गायब करने के आरोप में थानाध्यक्ष संतोष कुमार और दरोगा सुमन जी झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
वैशाली के पुलिस अधीक्षक (SP) ललित मोहन शर्मा ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए दोनों अधिकारियों को लाइन हाजिर कर दिया है। इस घटना के बाद से पूरे पुलिस विभाग में खलबली मची हुई है।
गुप्त सूचना पर हुई थी छापेमारी
मामले की जड़ें दो दिन पहले हुई एक छापेमारी से जुड़ी हैं। सदर एसडीपीओ गोपाल मंडल के अनुसार, लालगंज थानाध्यक्ष संतोष कुमार को सूचना मिली थी कि बिलनपुर गांव स्थित रामप्रीत सहनी के घर पर चोरी का माल छिपाया गया है और कुछ अपराधी उसे आपस में बांट रहे हैं। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर वहां धावा बोला गया। छापेमारी के दौरान अपराधी तो फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने घर से कुछ सामग्रियां बरामद कीं और एक महिला को हिरासत में लिया।
पुलिस पर लगा 60 लाख नकदी और 2 किलो सोना ‘लूटने’ का आरोप
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब आरोपी के रिश्तेदार गेना लाल सहनी ने पुलिस टीम पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीण और परिजनों का दावा है कि पुलिस ने घर से 50 से 60 लाख रुपये नकद, करीब 2 किलोग्राम सोना और 6 किलोग्राम चांदी बरामद की थी। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने इस भारी-भरकम राशि और आभूषणों को आधिकारिक जब्ती सूची (Seizure List) में दर्ज ही नहीं किया और उसे आपसी मिलीभगत से गायब कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने खुद पुलिस को थैलों में भरकर सामान ले जाते देखा था।
जांच के घेरे में ‘वर्दी वाले लुटेरे’
एसडीपीओ की शुरुआती जांच में थानाध्यक्ष और दरोगा की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके आधार पर एसपी ने सख्त कदम उठाया है। अब पुलिस मुख्यालय स्तर पर इस बात की गहन जांच की जा रही है कि जब्त किया गया करोड़ों का माल आखिर कहाँ गया। क्या पुलिस ने अपराधियों से सांठगांठ कर माल को ठिकाने लगाया या खुद ही उसे हड़प लिया?
यह मामला केवल विभागीय लापरवाही का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और लूट का प्रतीत हो रहा है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जांच के बाद यदि दोष सिद्ध होता है, तो केवल निलंबन नहीं बल्कि इन अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी।

