
भारत के रूस से तेल आयात पर अमेरिका द्वारा 500% टैरिफ लगाने की धमकी, भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है तो अमेरिका जल्द ही “टैरिफ बढ़ा सकता है।” यह चेतावनी यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका द्वारा भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर लगातार दबाव डालने के बीच आई है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल आयात में उल्लेखनीय बदलाव देखा है। 2016-17 के वित्तीय वर्ष में भारत ने रूस से तेल आयात नहीं किया था। उस समय इराक और सऊदी अरब प्रमुख आपूर्तिकर्ता थे, जिनसे भारत ने क्रमशः $3.6 बिलियन और $3.9 बिलियन का तेल खरीदा था। लेकिन 2022-23 में रूस भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बन गया, और 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर $46.5 बिलियन तक पहुंच गया। 2024-25 में रूस से आयातित तेल का मूल्य $50.3 बिलियन हो सकता है।
अब 2025-26 के दौरान, रूस का हिस्सा भारत के कुल तेल आयात में करीब एक-तिहाई है, जो 30.8 बिलियन डॉलर के बराबर है। हालांकि, इसके बावजूद, यह आंकड़ा राजनीतिक दबाव के कारण उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। उदाहरण के तौर पर, मई 2025 में रूस का हिस्सा 38.8% तक पहुंच गया था, लेकिन जुलाई में यह घटकर 29.8% हो गया। अक्टूबर और नवम्बर 2025 में रूस का हिस्सा 31-34% के बीच बना रहा।
अमेरिका का यह नया प्रस्तावित 500% टैरिफ, भारत के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है। रूस से सस्ता तेल खरीदने की रणनीति पर अमेरिका का दबाव भारत के लिए जटिल बन गया है, क्योंकि इसे ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्वायत्तता और अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो सकती है, क्योंकि एक 500% टैरिफ केवल तेल व्यापार को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार, विनिर्माण और तकनीकी साझेदारी को भी प्रभावित कर सकता है।
