
बिहार को फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को पटना के शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने ‘सर्वजन दवा सेवन अभियान’ (MDA) की औपचारिक घोषणा की। यह अभियान 10 से 27 फरवरी तक चलेगा, जिसमें 11 फरवरी को एक विशेष ‘मेगा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
एक दिन में रचेगा इतिहास:
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 11 फरवरी को मेगा अभियान के तहत राज्य के करीब 1.5 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ दवा बांटना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि 90% से अधिक लोग स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही दवा का सेवन करें। यह अभियान ‘वार-मोड’ में चलेगा ताकि फाइलेरिया उन्मूलन को जन-आंदोलन बनाया जा सके।”
40 हजार बूथ और 4 लाख वॉरियर्स:
अभियान की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 397 प्रखंडों में 40 हजार से अधिक बूथ सक्रिय किए जाएंगे। इस कार्य में 4 लाख प्रशिक्षित फ्रंटलाइन वर्कर्स और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा सेवन सुनिश्चित कराएंगी। आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी मेगा कैंप लगेंगे। किसी भी आपात स्थिति या दवा के साइड इफेक्ट (Adverse reaction) से निपटने के लिए ‘रैपिड रिस्पांस टीमें’ मोबाइल और स्थाई रूप से तैनात रहेंगी।
विभागीय तालमेल से बनेगा विश्व रिकॉर्ड:
स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कार्यक्रम में जोर दिया कि जीविका दीदियां, पंचायती राज संस्थाएं, आईसीडीएस और शिक्षा विभाग के आपसी सामंजस्य से ही इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने कहा कि हमारा संकल्प इस मेगा अभियान को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र (वर्ल्ड रिकॉर्ड) पर दर्ज कराना है। इसके लिए 2.10 लाख सेविका-सहायिकाओं और 1.15 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
सम्मान और संकल्प:
मंत्री मंगल पांडेय ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया उन्मूलन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और लक्ष्य 2027 तक बिहार को पूरी तरह हाथीपांव मुक्त करना है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों, प्रखंडों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए। हालांकि, इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डॉ. राजेश पांडेय सहित राज्य स्वास्थ्य समिति के कई वरीय पदाधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।