
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की लाइफलाइन माने जाने वाले पीएमसीएच (PMCH) में नर्सों के भारी आक्रोश के कारण अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। शनिवार को अस्पताल परिसर में सैकड़ों नर्सों ने प्रशासन की ‘मनमानी’ के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नर्सों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल विचार नहीं किया गया, तो वे 31 दिसंबर से पूरी तरह काम बंद कर हड़ताल पर चली जाएंगी।
वेतन कटौती और छुट्टियों पर ‘कैंची’ से भड़का गुस्सा
आंदोलनकारी नर्सों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के लगभग 415 नर्सों के वेतन में बड़ी कटौती कर दी है। नर्स वीथिका विश्वास ने बताया कि नर्सों ने छठ महापर्व जैसे बड़े त्योहारों पर स्वीकृत अवकाश (Leave) लिया था। लेकिन जब वे ड्यूटी पर लौटीं, तो उन्हें पता चला कि विभाग ने पिछली तारीख से उनकी छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन दिनों का वेतन काट लिया गया है। नर्सों का कहना है कि यह न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि उनके समर्पण का अपमान भी है।
प्रशासन की चुप्पी ने सुलगाई और आग
प्रदर्शन कर रही नर्सों ने आरोप लगाया कि वे पिछले चार दिनों से अपनी फरियाद लेकर पीएमसीएच अधीक्षक के पास जा रही हैं, लेकिन अधीक्षक महोदय उनसे मिलने को तैयार नहीं हैं। संवादहीनता की स्थिति ने नर्सों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। शनिवार को ड्यूटी छोड़कर नर्सों ने परिसर में नारेबाजी की और प्रशासन के तानाशाही रवैये की आलोचना की।
नीतीश और मंगल पांडे से हस्तक्षेप की गुहार
नर्सों ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि 30 दिसंबर तक अगर कटा हुआ वेतन वापस नहीं किया गया और छुट्टियों का मामला नहीं सुलझा, तो 31 दिसंबर की सुबह से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देंगी। नर्सों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।
यदि यह हड़ताल होती है, तो नए साल के मौके पर पीएमसीएच में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि नर्सों के बिना इमरजेंसी और वार्डों का संचालन लगभग असंभव हो जाएगा। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन की चुप्पी बनी हुई है।