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नीतीश के ‘हिजाब कांड’ पर डॉक्टर नुसरत की चुप्पी टूटी, 4 दिन बाद अचानक लिया बड़ा फैसला…

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नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हिजाब खींचे जाने के कथित विवाद को लेकर कई दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। राजकीय तिब्बी कॉलेज की डॉक्टर नुसरत परवीन ने पहली बार इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए साफ किया है कि वह मुख्यमंत्री से नाराज नहीं हैं और पूरे विवाद को बेवजह तूल दिया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, डॉक्टर नुसरत 20 दिसंबर को अपनी ड्यूटी जॉइन करेंगी। इस बीच विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है, लेकिन नुसरत की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बयानबाजी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुस्लिम महिला डॉक्टर नुसरत परवीन से जुड़े हिजाब विवाद ने कुछ दिनों तक बिहार की सियासत को गर्माए रखा, लेकिन अब यह मामला शांत होता नजर आ रहा है। राजकीय तिब्बी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) मोहम्मद महफजुर रहमान ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर नुसरत मुख्यमंत्री से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं। उन्होंने बताया कि नुसरत ने अपनी सहेली बिल्किस से बातचीत में कहा है कि इस पूरे प्रकरण को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। वहीं, पटना के राजकीय तिब्बी कॉलेज में पीजी की छात्रा नुसरत पिछले चार दिनों से कॉलेज नहीं आई थीं, जिसे लेकर उनके आहत होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि कॉलेज प्रशासन और शिक्षकों का कहना है कि नुसरत एक मेधावी छात्रा हैं और पिछले सात वर्षों से हिजाब पहनकर ही कॉलेज आती रही हैं। घटना के बाद वह कुछ समय के लिए शांत जरूर रहीं, लेकिन अब उन्होंने आगे बढ़ते हुए अपनी नई नियुक्ति जॉइन करने का निर्णय ले लिया है, जिससे विवाद के पटाक्षेप के संकेत मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस पूरे घटनाक्रम को गलत संदर्भ में पेश किए जाने की बात कहते हुए स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंशा पर सवाल उठाना अनुचित है। उनके अनुसार, यह कोई विवादित या आपत्तिजनक व्यवहार नहीं था, बल्कि एक अभिभावक की तरह स्नेह और सम्मान का भाव था, जिसे गलत अर्थों में लिया गया। प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का पूरा सार्वजनिक जीवन महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान के लिए समर्पित रहा है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने अपील की कि तथ्य और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ही इस तरह के मामलों पर प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक भ्रम और तनाव की स्थिति न बने।

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